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करमापा के जवाब संदिग्ध, दलाई लामा ने माना ढिलाई हुई

Karmapa lama
धर्मशाला। भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे तिब्बतियों के धर्मगुरू करमापा के मठों से अलग-अलग देशों की मुद्राओं में प्राप्त विशाल धनराशि को लेकर भारतीय उच्चाइधिकीरियों की जांच जारी है। जांच अधिकारी एक ओर करमापा की संपत्तियों की जांच कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनसे पूछ-ताछ कर इस विशाल धनराशि के स्रोतों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश पुलिस के हवाले से मिली खबरों के मुताबिक करमापा से पूछताछ में अब तक कोई महत्वपूर्ण सुराग हाथ नहीं लगा है। ना ही करमापा ऐसे जवाब दे पा रहे हैं कि वह इस मामले में निर्दोष साबित हो सकें। 17वें करमापा से दो दिन की लगातार पूछताछ के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंच रही है कि करमापा जरूर कुछ छिपा रहे हैं।

जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि करमापा जानबूझकर तथ्यों को छिपा रहे हैं।वे किसी भी बात का सीधा जवाब नहीं दे रहा और हर सवाल के जवाब में घूम-फिर कर एक ही बात दोहरा रहे हैं कि उनके अनुयायी विश्व के कोने-कोने में फैले हैं, उन्होने ही ये धनराशि चढ़ावे में भेंट की है।

दलाई लामा

तिब्बतियों के प्रमुख धर्मगुरू और नोबल पुरस्कार विजेता बेंगलुरू में रविवार शाम एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब हुए और उन्होने कहाकि वह इस मामले में विस्तृत जांच कराने के इच्छुक हैं। दलाई लामा ले माना कि इस मामले में जरूर कुछ ढिलाई हुई है।

गुरु दलाई लामा ने पत्रकारों से कहा, "करमापा के नकदी कारोबार की विस्तृत जांच होनी चाहिए। चूंकि वह एक महत्वपूर्ण लामा हैं, उनके शिष्यों की संख्या ज्यादा है और उनके चीन में भी कई शिष्य हैं।" उन्होने कहाकि इस मामले में 'कुछ लापरवाही' बरती गई जिसकी जांच किए जाने की जरूरत है।

पुलिस की जांच

पुलिस का मानना है कि करमापा के सहयोगी रूब्गी चोसंग की संलिप्तता से इस राशि का इस्तेमाल कांगड़ा जिले के धर्मशाला में किसी 'अवैध' भूमि कारोबार में होना था। चोसंग इस समय पुलिस हिरासत में है।

दूसरी ओर करमापा के वकील नरेश ठाकुर ने पत्रकारों को बताया कि मठ को मिलने वाले दान के बारे में केंद्र सरकार को पहले ही जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा, "मठ के समीप भूमि खरीदने के लिए मठ के अधिकारियों ने राज्य से अनुमति मांगी है।" मठ से जब्त मुद्रा में भारी मात्रा में चीनी मुद्रा युआन (70 लाख रुपये) का मिलना हैरत में डालने वाला रहा। मठ से चीनी मुद्रा की बरामदगी से करमापा का कथित रूप से चीन के साथ सम्बंध होने का विवाद शुरू हो गया।

मामले की शुरुआत

मामले की शुरुआत दिमाचल के ऊना जिले में दो व्यक्तियों के पास एक करोड़ की धनराशि बरामद होने पर हुई थी। बात में इन व्यक्तियों के तार करमापा के मठ से जुड़ते दिखाई दिए। संदिग्ध हालातों के चलते करमापा के मठों पर छापे पड़े और वहां अलग-अलग मुद्राओं में प्राप्त विशाल धनराशि का बरामदगी से मामला चर्चा में आ गया।

धर्मशाला के व्यवसायी भारद्वाज के बारे में माना जा रहा है कि उन्होंने करमापा के न्यास के साथ मिलकर एक भूमि का करार किया। इस सिलसिले में भारद्वाज और हरियाणा के एक बैंक प्रबंधक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। ठाकुर ने बताया, "भारद्वाज को शनिवार शाम गिरफ्तार किया गया। गत 25 जनवरी को ऊना जिले के मेहतापुर में उनके दो लोगों से अनाम एक करोड़ रुपये जब्त किए गए।

भारद्वाज ने दावा किया था कि यहां भूमि खरीदने के लिए करमापा के न्यास ने इस रुपये का भुगतान उनके लोगों को किया। इसके बाद ही करमापा के मठ पर छापे मारे गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कार्पोरेशन बैंक के प्रबंधक धर को शनिवार रात गिरफ्तार किया गया। उस पर आरोप है कि उसने भारद्वाज को एक करोड़ रुपये गलत तरीके से आरहण करने में मदद की।

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