अमेरिका में भारतीय छात्रों से साथ बदसुलूकी, भारत सरकार का हस्तक्षेप
मालूम हो कि, कैलीफोर्निया के एक 'शैम' विश्वविद्यालय ने भारतीय छात्रों को अपने यहां पढ़ने के लिए बुलाया लेकिन वह इस अमेरिकन विश्वविद्यालय का फर्जीवाड़ा था। भारत से इस यूनिवर्सिटी में पहुंचे छात्र अबी इस समस्या में उलझे ही थे कि उनके वीजा की अवधि खत्म हो गई और इसके बाद वहां मौजूद इन छात्रों को अमेरिकी सुरक्षा बलों ने मॉनीटरिंग संयंत्र पहनने पर मजबूर किया। इस संयंत्र को टखनों पर बांधा गया है जिससे इन छात्रों की अमेरिका में निगरानी की जा सके। भारत स रकार ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है।
प्लीसैंटन स्थित ट्राई-वैली विश्वविद्यालय (शैम विश्वविद्यालय) के करीब 1555 छात्रों में से 90 प्रतिशत छात्र भारत के हैं। इनमें से ज्यादातर छात्र आंध्र प्रदेश से आते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने पैसे लेकर छात्रों को वीजा बेचने के आरोप में विश्वविद्यालय पर ताला लगा दिया। कुछ छात्र मदद के लिए आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) के कार्यालय गए लेकिन उन्हें 'इंटेंस सुपरविजन एंड अपीयरेंस प्रोग्राम' (आईएसएपी) के तहत रख दिया गया। इसके तहत उन पर गहन निगरानी रखी जा रही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बाबत कहा, "हमने अमेरिकी अधिकारियों से छात्रों के बारे में अपना संदेश दिया है। इनमें से ज्यादातर छात्र वीजा मामले के शिकार हैं। अमेरिकी अधिकारियों से छात्रों के साथ निष्पक्ष एवं उचित व्यवहार करने के लिए कहा गया है।" उन्होंने कहा, "अमेरिकी कानूनों के अनुरूप पहले हिरासत में लिए गए और बाद में निगरानी उपकरण के साथ छोड़े गए छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई अवांछनीय है और निगरानी उपकरण को हटाया जाना चाहिए।"
प्रकाश ने कहा कि एमईए और सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास भारतीय छात्रों और अमेरिकी अधिकारियों के साथ सम्पर्क में है। उन्होंने कहा कि छात्रों की 'वैध हितों' की सुरक्षा के लिए 'हरसंभव कदम' उठाए जाएंगे।













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