मिस्र में संयम बरतें लोग :अमेरिका

मिस्र में पिछले पाँच दिन से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता व्यक्त की है. जहाँ अमरीका ने संयम की अपील की है वहीं जापान ने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत करने को कहा है. ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने मिस्र की सरकार से कहा है कि वह हिंसक प्रतिक्रिया से बचे और जल्द सुधारों को लागू करने को प्राथमिकता दे.
मंगलवार से मिस्र की राजधानी काहिरा और अन्य जगहों पर हो रहे प्रदर्शनों में अब तक लगभग सौ लोग मारे गए हैं. मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने पहली बार उपराष्ट्रपति की नियुक्ती की है जो गुप्तचर सेवा के प्रमुख उमर सुलेमान हैं. वायुसेना के पूर्व प्रमुख अहमद शफ़ीक़ को प्रधानमंत्री बनाया गया है.
लेकिन विपक्षी नेता मोहम्मद अल बारादेई ने इन क़दमों को ख़ारिज किया है और कहा है कि जनता लोगों का बदलाव नहीं बल्कि सत्ताधारी शासन का बदलाव चाहती है. मिस्र में रात के कर्फ़्यू के बाद काहिरा में लोगों ने लूटपाट से बचने के लिए लगाए नाकों को हटाना शुरु कर दिया है
काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोगों को लूटपाट से बचने की सलाह देने से प्रशासन को कुछ लोगों को घर के अंदर रहने के प्रोत्साहित करने में सफलता मिली है. लेकिन ताज़ा जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारी रविवार को फिर काहिरा बीचोंबीच एकत्र होने शुरु हो गए हैं.
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार मिस्र में मौजूद लगभग 3600 पर्सन्स ऑफ़ इंडियन ऑरिजिन यानी भारतवंशी लोग सुरक्षित हैं. इनमें से लगभग 2200 लोग काहिरा में हैं.
काहिरा में लूटपाट, निगरानी दल गठित
काहिरा में भारतीय दूतावास ने 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है जिसके नंबर हैं - 202-27360556, 202-27360052 और 202-27356168. भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि मिस्र में वर्तमान स्थिति को देखते हुए जब तक कि अत्यंत ज़रूरी न हो, वे मिस्र न जाएँ.
शनिवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने सुरक्षा सलाहकारों के साथ मिस्र की स्थिति पर चर्चा की और बाद में राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में संयम की अपील की गई. बयान में कहा गया, "राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि हमारा ध्यान हिंसा का विरोध करने, संयम बरतने, मौलिक अधिकारों की रक्षा करने पर केंद्रित है. साथ ही मिस्र में राजनीतिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस क़दम उठाए जाएँ."
अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्त फ़िलिप क्रॉली के अनुसार, "वे (प्रदर्शनकारी) अपनी सरकार से असली सुधारों के लिए सार्थक प्रक्रिया शुरु करने की उम्मीद कर रहे हैं. मिस्र की सरकार केवल ताश के पत्तों को फैंटकर अलग खड़ी नहीं रह सकती है. राष्ट्रपति मुबारक ने सुधारों का जो वादा किया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए."
क्रॉली ने ट्विटर पर एक और संदेश में लिखा है, "मिस्र की गलियों में अब भी प्रदर्शनकारी मौजूद हैं और हमारी चिंता है कि वहाँ हिंसा न भड़के. हम सभी पक्षों से समय बरतने की दोबारा अपील करते हैं." स्विट्ज़रलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक फ़ोरम की बैठक में मौजूद दुनिया के अनेक नेताओं ने मिस्र की स्थिति पर चिंता जताई है. जापान के प्रधानमंत्री नाओटो कान ने राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के आहवान किया कि वे अपने लोगों से बातचीत शुरु करें.
कान का कहना था, "वहाँ कुछ सामाजिक अस्थिरता है लेकिन राष्ट्रपति मुबारक ने सुधारों की घोषमा की है. हम उम्मीद करते हैं कि मिस्र की सरकार तत्काल अपने लोगों से बातचीत शुरु करेगी. साथ ही प्रशासन सुधार शुरु करेगा ताकि लोगों की भागीदारी और समर्थन सुनिश्चित किया जा सके."
उधर स्वीडन के विदेश मंत्री कार्ल बिल्ट ने कहा है कि दुनिया की नज़र मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के सुधार एजेंडा पर है, विशेष तौर पर वर्ष 2011 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराने पर. संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा कि उन्हें लगता है कि राजनीतिक बदलाव की वर्तमान माँग को राका नहीं जा सकते.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, जर्मनी की चांस्लर एंगिला मर्कल और फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम राष्ट्रपति मुबारक से अपील करते हैं कि वे किसी भी कीमत पर निशस्त्र नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा के इंस्तेमाल से बचें. हम प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण ढंग से करें."












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