संकट से घिरा है पाकिस्तान : अहमद राशिद
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। 'तालिबान' व 'डिसेंट इंटू चाओस' जैसी किताबें लिखने वाले पाकिस्तान के शीर्ष लेखक अहमद राशिद ने कहा है कि उनका देश कई तरह के संकट से घिरा हुआ है और समाज के आम लोग कहीं और शरण लेने को विवश हैं।
अहमद ने कहा कि पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारों का समर्थन करने वाले लाखों लोगों ने जैसी प्रतिक्रिया दी है, उससे उनके देश को झटका लगा है और ये लोग खुदा की निंदा से जुड़े कानून में संशोधन की खिलाफत करने वालों के हिमायती हैं।
सीएनएन-आईबीएन टीवी चैनल के कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' के प्रस्तुतकर्ता करन थापर को दिए साक्षात्कार में अहमद ने रविवार को कहा, "चिंता की बात यह है कि सभी संकट एक साथ आए हैं। वहां आर्थिक संकट है, जिसने काफी जटिलता पैदा कर दी है, साथ ही राजनीतिक और विदेश नीति का संकट भी है, जिस वजह से भारत के साथ रिश्ता बिगड़ा है। अफगानिस्तान के साथ भी रिश्ता तनाव भरा है, जिसकी जड़ में आतंकवाद है। उग्रवादियों के कई समूह हैं, जिन पर काबू पाने में सेना सक्षम नहीं है। इस पर से बाढ़ की तबाही भी आ गई।"
उन्होंने कहा कि उनके देश की हालत चिंताजनक है। ठीक वैसे ही हालात पैदा हो गए हैं, जिन हालात में बंटवारे के बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया।
अहमद ने कहा, "पाकिस्तानी सरकार, सेना और समाज के आम लोग, सभी ताज्जुब में हैं। लंबे अरसे से मेरे जैसे और भी लोगों में बीज फूट रहा है।"
उन्होंने कहा, "सच तो यह है कि हमने अपनी धरती पर पाकिस्तानी तालिबान, अफगानी तालिबान और उग्रवादियों के अन्य समूहों को पनपने दिया और वे मध्यवर्ग के पहलू में घुस आए। यहां तक कि शैक्षिक प्रतिष्ठानों, सेना और पुलिस में भी। तासीर की हत्या एक पुलिसकर्मी ने ही की।"
अहमद ने पाकिस्तान की इस हालत के लिए 'तालिबान जैसी सोच' को जिम्मेदार ठहराया और कहा, "समाज के आम लोग कहीं और शरण लेने को विवश हैं।"
अहमद ने कहा कि यह दुखद है कि हालात सुधरने का कोई रास्ता निकालने के बारे में पूछने पर राजनीतिक पार्टियां जवाब नहीं दे पा रही हैं, यहां तक कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी नहीं।
लेखक ने कहा कि 'पाकिस्तानी सेना भयभीत' है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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