करमापा छुपा रहे तथ्य, दोबारा होगी पूछताछ : पुलिस (राउंडअप)
धर्मशाला, 30 जनवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश पुलिस का मानना है कि तिब्बती धर्मगुरु 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजी बरामद भारतीय और विदेशी मुद्राओं के बारे में की जा रही पूछताछ में पूरी सच्चाई बयां नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने उनसे दोबारा पूछताछ करने का निर्णय लिया है।
जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को आईएएनएस को बताया कि करमापा जानबूझकर तथ्यों को छिपा रहे हैं।
पूछताछ में अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार कर चुके करमापा ने छापे के दौरान उनके मठ से जब्त मुद्रा के बारे में कहा कि इन्हें उनके शिष्यों ने भेजा और उन्होंने भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं किया। उधर, तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने बेंगलुरू में कहा कि वह मठ से जब्त मुद्रा की विस्तृत जांच कराए जाने के पक्ष में हैं।
ऊना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के. जी. कपूर के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश पुलिस का एक दल करमापा से उनके परिसर से जब्त करीब सात करोड़ रुपये कीमत की भारतीय और विदेशी मुद्रा के बारे में पूछताछ के लिए ग्यूतो तांत्रिक मठ पहुंचा। उनसे शुक्रवार को भी पूछताछ की गई थी।
पुलिस महानिरीक्षक पी.एल. ठाकुर ने कहा, "विदेशी मुद्रा और अन्य नकदी के बारे में झूठी अनभिज्ञता जताकर करमापा जानबूझकर कुछ तथ्यों को छिपा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "इस बात की पूरी सम्भावना है कि आने वाले कुछ दिनों में उनसे दोबारा पूछताछ की जाएगी।" पुलिस अधिकारी ने कहा कि 'मठ के कुछ और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।'
पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि करमापा ने वित्तीय लेन-देन से जुड़े कुछ सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया।
उन्होंने कहा, "मठ के कर्मचारियों ने इसके पहले हुई पूछताछ में स्वीकार किया कि सभी वित्तीय लेन देन करमापा की जानकारी में हुए।" अधिकारी ने बताया कि करमापा की बहन और उनके करीबी सहयोगियों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि करमापा के सहयोगी रूब्गी चोसंग की संलिप्तता से इस राशि का इस्तेमाल कांगड़ा जिले के धर्मशाला में किसी 'अवैध' भूमि कारोबार में होना था। चोसंग इस समय पुलिस हिरासत में है।
करमापा से पूछताछ के कुछ देर बाद तिब्बती धर्मगुरु के एक प्रवक्ता ने उनके ऊपर लगे आरोपों से इंकार किया। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि वह चीन के एजेंट नहीं हैं।
प्रवक्ता कर्मा तोदपेन ने कहा, "भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने और उन्हें कमजोर करने के लिए करमापा ने कुछ गलत नहीं किया है।"
करमापा का चीन के साथ सम्बंध पर प्रवक्ता ने कहा, "उनका तिब्बत से भागकर भारत आना स्पष्ट रूप से बताता है कि तिब्बती नागरिक चीन द्वारा दबाए जा रहे हैं।"
उन्होंने करमापा द्वारा तिब्बत छोड़ने के कारणों के बारे में भी बताया। प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने करमापा पर तिब्बती अध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के खिलाफ आवाज उठाने का दबाव बनाया।
करमापा के वकील नरेश ठाकुर ने पत्रकारों को बताया कि मठ को मिलने वाले दान के बारे में केंद्र सरकार को पहले ही जानकारी दे दी गई है।
उन्होंने कहा, "मठ के समीप भूमि खरीदने के लिए मठ के अधिकारियों ने राज्य से अनुमति मांगी है।"
मठ से जब्त मुद्रा में भारी मात्रा में चीनी मुद्रा युआन (70 लाख रुपये) का मिलना हैरत में डालने वाला रहा। मठ से चीनी मुद्रा की बरामदगी से करमापा का कथित रूप से चीन के साथ सम्बंध होने का विवाद शुरू हो गया।
उल्लेखनीय है कि करमापा वर्ष 2000 में तिब्बती क्षेत्र स्थित अपने ल्हासा मठ से रहस्यमय परिस्थितियों में यहां पहुंचे थे।
धर्मशाला के व्यवसायी भारद्वाज के बारे में माना जा रहा है कि उन्होंने करमापा के न्यास के साथ मिलकर एक भूमि का करार किया। इस सिलसिले में भारद्वाज और हरियाणा के एक बैंक प्रबंधक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है।
ठाकुर ने बताया, "भारद्वाज को शनिवार शाम गिरफ्तार किया गया। गत 25 जनवरी को ऊना जिले के मेहतापुर में उनके दो लोगों से अनाम एक करोड़ रुपये जब्त किए गए।
भारद्वाज ने दावा किया था कि यहां भूमि खरीदने के लिए करमापा के न्यास ने इस रुपये का भुगतान उनके लोगों को किया। इसके बाद ही करमापा के मठ पर छापे मारे गए।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि कार्पोरेशन बैंक के प्रबंधक धर को शनिवार रात गिरफ्तार किया गया। उस पर आरोप है कि उसने भारद्वाज को एक करोड़ रुपये गलत तरीके से आरहण करने में मदद की।
बेंगलुरू में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे तिब्बती आध्यत्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा कि वह करमापा के मठ से चीनी मुद्रा सहित सात करोड़ रुपये मूल्य की अन्य मुद्राओं की बरामदगी की विस्तृत जांच कराए जाने के पक्ष में हैं।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "करमापा के नकदी की विस्तृत जांच होनी चाहिए। चूंकि वह एक महत्वपूर्ण लामा हैं, उनके शिष्यों की संख्या ज्यादा है और उनके चीन में भी कई शिष्य हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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