मिस्र में प्रदर्शन उग्र, अलजजीरा पर प्रतिबंध

काहिरा। मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता से हटाने के लिए रविवार को सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई झड़पों में कम से कम 10 प्रदर्शनकारी मारे गए। इसके साथ ही प्रदर्शन उग्र हो गया है। सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे 10 हजार लोगों पर नियंत्रण पाने के लिए सेना को तैनात किया गया है। उग्र प्रदर्शन के चलते अब राष्ट्रपति मुबारक की सत्ता को खतरा उत्पन्न हो गया है।

मिस्र में हो रहे प्रदर्शन का सीधा प्रसारण करने वाले अरब देश के टेलीविजन चैनल अल जजीरा पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। भारत, सऊदी अरब और तुर्की ने मिस्र से अपने नागरिकों को वापस बुलाने के लिए विशेष विमानों की व्यवस्था की है।मिस्र के समर्थन में जोर्डन और यमन में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

मिस्र में प्रदर्शन के पांचवें दिन रविवार को शर्म-अल-शेख के पर्यटन स्थल सिनाई में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण में करने के लिए सेना को उतारना पड़ा जबकि काहिरा हवाई अड्डे पर अपने देश वापस जाने के लिए यात्रियों की भारी भीड़ जमा है।रेडियो अल अरेबिया के मुताबिक काहिरा स्थित अमेरिका दूतावास ने अपने नागरिकों को जितना जल्दी हो सके मिस्र छोड़ने की सलाह दी है।

टेलीविजन चैनल अलजजीरा के मुताबिक रविवार को गृह मंत्रालय के भवन के समीप पुलिस के साथ हुई झड़पों में 10 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए।लोकतंत्र समर्थक नेता मोहम्मद अल बरदेई ने मुबारक के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि सिर्फ सरकार को भंग करना ही पर्याप्त नहीं है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने की अपील दोहराई है।

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक मिस्र के सरकारी टेलीविजन द्वारा रविवार को की गई घोषणा के अनुसार मिस्र में अलजजीरा के पत्रकारों की मान्यता निरस्त कर दी गई है और चैनल का संचार उपग्रह से सम्पर्क काट दिया गया है।राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक की सरकार के विरोध में काहिरा और मिस्र के अन्य शहरों में हो रहे प्रदर्शन को इस टेलीविजन चैनल ने सीधा प्रसारण किया था।

ज्ञात हो कि शनिवार को मुबारक ने सरकार को भंग कर पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री अहमद शफीक को नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था और उन्हें नए मंत्रिमंडल का गठन करने का आदेश दिया था, लेकिन मुबारक के इस कदम के बावजूद मिस्र में विरोध प्रदर्शन नहीं रुका।प्रदर्शनकारी अभी भी पिछले 30 वर्षो से सत्ता में काबिज राष्ट्रपति को सत्ता से हटने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, मुबारक ने अपने पद से इस्तीफा देने से इंकार किया है।

अल जजीरा ने रविवार को एक अन्य रपट में कहा कि काहिरा के दक्षिण पश्चिम में लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रशासनिक प्रभाग, फय्यूम गवर्नोरेट में एक अज्ञात हमलावर ने एक स्थानीय जेल के अधीक्षक की गोली मार कर हत्या कर दी और कई सौ कैदियों को मुक्त कर दिया।इसके पहले अल-जजीरा ने कहा था कि काहिरा और मिस्र के अन्य शहरों में पुलिस के साथ हुए संघर्षो में लगभग 100 लोग मारे गए हैं। विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में 1,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कई लोग अभी तक लापता हैं।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र की सड़कों पर प्रदर्शनरत मिस्रवासियों से हिंसा से बाज आने की दोबारा अपील की है। ओबामा ने यह अपील ह्वाइट हाउस में अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल के साथ बैठक के बाद की।मिस्र में फैली अशांति को देखत हुए भारत सरकार ने वहां मौजूद अपने नागरिकों को वापस बुलाने के लिए एक विशेष विमान भेजने की व्यवस्था की है।

सरकारी सूत्रों ने नई दिल्ली में कहा कि 300 यात्रियों की क्षमता वाले एयर इंडिया के एक विमान को काहिरा भेजा जा रहा है ताकि मिस्र में निवास कर रहे या वहां घूमने गए भारतीय नागरिक अपनी इच्छानुसार स्वदेश लौट सकें।सूत्रों ने कहा कि मिस्र में निवास कर रहे करीब 3,600 भारतीयों ने स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है और इस उड़ान की व्यवस्था उनके आग्रह पर ही की गई है। मिस्र में निवास कर रहे 3,600 भारतीयों में से 2,200 अकेले काहिरा में रहते हैं।

मुबारक के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलनरत प्रदर्शनकारियों को यमन में भी समर्थन मिल रहा है। यहां भी लोगों ने सड़कों पर उतर कर मिस्र में चल रहे मुबारक विरोधी आंदोलन का समर्थन किया और साथ ही यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के खिलाफ भी नारेबाजी की।
समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती ने मीडिया रपटों के हवाले से रविवार को कहा कि प्रदर्शनकारियों में विपक्षी राजनीतिज्ञ और पत्रकार शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को साना स्थित मिस्र के दूतावास की ओर मार्च किया।

सीएनएन ने कहा कि प्रदर्शन में कोई 100 की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।यमन के अलावा जोर्डन में भी शनिवार को राष्ट्रपति मुबारक की सरकार के विरोध में लोग सड़कों पर आए। उन्होंने मिस्र के दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया।समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक श्रमिक संगठनों, इस्लामिक संगठनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को मुबारक के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने मिस्र में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का समर्थन किया।

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