बेनामी सम्पत्ति जब्त करने को बनेगा नया कानून : मोइली

लखनऊ, 30 जनवरी(आईएएनएस)। केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों (नेताओं) की बेनामी सम्पत्ति व चोरी के धन को जब्त करने के लिए केंद्र सरकार एक नया कानून लाने जा रही है।

लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मोइली ने रविवार को संवाददाताओं से कहा, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार देश से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए पूरी तरह कटबिद्ध है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही एक ऐसा कानून लाने जा रही है, जिसके तहत नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों के चोरी के धन और नाजायज सम्पत्ति को जब्त करने के प्रावधान होंगे।"

विधि मंत्री ने कहा कि देश में अब तक नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों की बेनामी सम्पत्ति को जब्त करने का कोई कानून नहीं था। केंद्र सरकार इस कानून के लिए संसद के अगले सत्र में विधेयक लाने पर विचार कर रही है।

मोइली ने कहा कि अगले तीन महीने के अंदर देश की सभी निचली अदालतें त्वरित अदालतों (फास्ट ट्रैक कोर्ट) का स्वरूप ले लेंगी। इस योजना को लागू करने में आने वाले खर्च के लिए केंद्र की तरफ से सभी राज्यों को 20 हजार करोड़ रुपये मुहैया कराए गए हैं।

उन्होंने बताया कि त्वरित अदालतों के गठन के बाद देश में लम्बित भ्रष्टाचार के सभी मामलों का निस्तारण छह माह से एक साल के अंदर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो कोई भ्रष्टाचार में लिप्त है, उसे दंडित किया जाना चाहिए, भले ही वह ऊंचे ओहदे या रसूख वाला ही क्यों न हो।

विधि मंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार और स्वास्थ्य का अधिकार के समान ही देश को न्याय के अधिकार की भी जरूरत है। संप्रग सरकार सभी के लिए न्याय का अधिकार सम्बंधी विधेयक जल्द ही पेश करेगी।

मोइली ने कहा, "न्याय का अधिकार देश के हर नागरिक को मिलना चाहिए और सभी को न्याय तक पहुंच दिलाई जानी चाहिए।"

उन्होंने हालांकि संसद में इस विधेयक को पेश किए जाने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई। मोइली ने कहा कि पहले इसके मसौदा में बदलाव किए जाएंगे और तब इसे कैबिनेट को सौंपा जाएगा।

उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने अदालतों से भ्रष्टाचार समाप्त करने की न्यायिक जवाबदेही मानक विधेयक संसद में पेश कर एक बड़ी पहल की है। इस विधेयक में न्यायिक मानक निर्धारित करने तथा न्यायाधीशों की जवाबदेही तय करने के अलावा उच्चतम न्यायालय और देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के किसी न्यायाधीश के भ्रष्टाचार में लिप्त होने या उसकी अयोग्यता के सम्बंध में व्यक्तिगत शिकायतों की जांच के लिए विश्वसनीय प्रणाली विकसित करने का प्रावधान है।

केंद्रीय सतर्कता आयुक्त पी.जे.थॉमस के इस्तीफा न देने के सवाल पर मोइली ने कहा, "यह मामला फिलहाल सर्वोच्च अदालत में लम्बित है, ऐसे में देश का विधि मंत्री होने के नाते मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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