भारतीय विद्यार्थियों के प्रति अमेरिकी व्यवहार अस्वीकार्य : कृष्णा

कृष्णा ने यहां संवाददाताओं से कहा, "अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ विद्यार्थियों के साथ जिस तरीके का व्यवहार किया गया है, वह अस्वीकार्य है।"

कृष्णा ने कहा, "भारत सरकार की राय में यह घटनाक्रम अपरिहार्य हैं और जले पर नमक छिड़कने वाला है।"

कृष्णा ने अमेरिका से कहा कि इस बात को हर हाल में महसूस किया जाना चाहिए कि उच्च शिक्षा में दोनों देशों के बीच पारस्परिक आदान-प्रदान में भारी दांव लगे हुए हैं।"

कृष्णा ने विद्यार्थियों को कानूनी और वाणिज्य दूतावास के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया।

ज्ञात हो कि ट्राई-वैली यूनिवर्सिटी की धोखाधड़ी का शिकार हुए कुछ भारतीय विद्यार्थियों को टखने में रेडियो कॉलर बांधने के लिए बाध्य किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को शर्मसार होना पड़ा है। इस घटना से पूरे भारतीय समुदाय में आक्रोश की लहर पैदा हो गई है।

इस घटना पर भारत सरकार ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित अमेरिका के उप राजदूत से बात की और रेडियो कॉलर के इस्तेमाल को अनधिकृत व अनुचित बताया।

ट्राई-वैली यूनिवर्सिटी के कोई 1,555 विद्यार्थियों को इसके बंद होने के बाद छात्र वीजा बेचने के आरोप में स्वदेश भेजा जा सकता है। इस विद्यालय के 90 प्रतिशत विद्यार्थी भारत से है और उनमें से अधिकांश आंध्र प्रदेश के हैं।

कुछ विद्यार्थियों ने मदद के लिए आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) से सम्पर्क किया था। ऐसे विद्यार्थियों को आईएसएपी (इंटेंस सुपरविजन एंड एपियरेंस प्रोग्राम) के तहत कैद कर लिया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।

उत्तरी अमेरिका के तेलुगू एसोसिएशन (टीएएनए) के जयराम कोमाती ने आईएएनएस को बताया कि आईसीई के एजेंटों ने पहले ही कई सारे छात्रों का साक्षात्कार कर लिया है। अधिकांश छात्रों से पूछताछ कर उन्हें रिहा कर दिया गया है लेकिन उनमें से कुछ को रेडियो कॉलर बांधना अनिवार्य कर दिया गया है।

भारत ने इस कदम का विरोध किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने नई दिल्ली में कहा, "हमने अमेरिकी प्रशासन से कहा है कि अधिकांश विद्यार्थी अपने आप में पीड़ित हैं, लिहाजा उनके साथ न्यायोचित तरीके से पेश आया जाए। गिरफ्तारी के बाद रिहा किए गए विद्यार्थियों के एक समूह को अमेरिकी कानून के मुताबिक रेडियो कॉलर पहनाना अनधिकृत है और उसे तत्काल हटा लिया जाना चाहिए।"

अमेरिका के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन डोनाल्ड लू को विदेश मंत्रालय बुला कर भारत की चिंता के बारे में उन्हें अवगत कराया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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