नई कैबिनट का खुलासा शुरू, दिग्गज अपने दुर्गों में सुरक्षित

टॉप चार मंत्रियों के मंत्रालयों से छेड़-छाड़ ना होने के सुराग पहले ही मिल चुके थे। ये वैसे के वैसे अपने पूर्व आकार और स्वरूप में अब भी मौजूद हैं। रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, और गृह मंत्रालय पहले ही सेफ जोन में थे। इसके अलावा कपिल सिब्बल के पास भी उनके दोनों मंत्रालय, मानव संसाधन और टेलीकॉम मौजूद हैं। शरद पवार भी अपने खाद्य गढ़ में पूर्व की भांति सुरक्षित बैठे हैं।
पहले बात करते हैं, उन दिग्गजों की जिन्होने अपनी रियासतें इस फेर-बदल में गंवा दी हैं-
१. पहला नाम प्रफुल्ल पटेल का है, आपके हाथों से नागरिक उड्डयन मंत्रालय छीन लिया गया है और हेवी इंडस्ट्री पकड़ाया गया है।
२. दूसरा कुठाराघात खेल मंत्री एमएस गिल पर हुआ है, उनका खेल मंत्रालय अब उनका नहीं रहा। हालांकि अब इस मलाईदार मंत्रालय की जगह उन्हे सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय थमा दिया गया है।
३. कमलनाथ को शहरी विकास मंत्रालय थमा दिया गया है।
४. मुरली देवड़ा को कॉरपोरेट अफेयर्स मिला है।
५. कॉरपोरेट मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद को जल संसाधन मंत्रालय दिया गया है।
६. इस्पात मंत्रालय पर बेनी प्रसाद का अधिकार।
७. केवी थॉमस को मिला खाद्य, उपभोक्ता मामले, जनविकास मंत्रालय।
८. श्रीप्रकाश जायसवाल के भरोसे कोयला मंत्रालय।
९. पवन कुमार बंसल देखेंगे संसदीय कार्य, साइंस टेक्नॉलजी मंत्रालय।
१०. जयपाल रेड्डी को पेट्रोलियम मंत्रालय थमाया गया।
११. सुबोधकांत सहाय को पर्टयन विकास मंत्रालय दिया गया।
१२. इसके अलावा अश्विनी कुमार और केसी वेणुगोपाल को राज्यमंत्री बनाया गया है। वेमुगोपालन को ऊर्जा मंत्रालय सौंपा गया है जबकि अश्विनी को मिला योजना, संसदीय कार्य मंत्रालय।
१३. विलास राव देशमुख को मिला ग्रामीण विकास मंत्रालय।
१४. सीपी जोशी को मिला रोड ट्रांसपोर्ट, हाईवे मंत्रालय।
नये चेहरों में सबसे प्रमुख नाम अजय माकन का उभरा है। जिनके जिम्मे बेहद महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए गए हैं। गिल साहब से छीना गया खेल मंत्रालय भी माकन को मिला है, इसके अलावा युवा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर डाली गई है।












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