मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलों के बीच राष्ट्रपति से मिले मनमोहन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद में फेरबदल की लम्बे समय से चली आ रही अफवाहों को सोमवार शाम उस समय और बल मिल गया जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मुलाकात की। अधिकारियों ने हालांकि कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच आगामी बजट सत्र, मूल्य वृद्धि, मुद्रास्फीति तथा आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।प्रधानमंत्री कार्यालय ने हालांकि इसे 'नियमित' मुलाकात बताया है।
राष्ट्रपति कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच 45 मिनट लंबी बैठक चली, जिसमें 'महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों' पर चर्चा हुई।प्रवक्ता ने कहा कि जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें आगमी बजट सत्र, मूल्य वृद्धि तथा आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
दोनों नेताओं के बीच बैठक संसद के आगामी बजट सत्र को लेकर तथा मीडिया में व्यक्त की गई इस संभावना के बीच हुई कि इस सप्ताह के अंत तक प्रधानमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद में फेरबदल कर सकते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी से जब इस सम्बंध में पूछा गया तो उन्होंने सीधा सा जवाब दिया, "मंत्रिपरिषदमें फेरबदल प्रधानमंत्री का और कांग्रेस कार्यसमिति का गठन कांग्रेस अध्यक्ष का विशेषाधिकार है।"उल्लेखनीय है कि वर्तमान मंत्रिपरिषद में कुछ मंत्री ऐसे हैं जिनके पास कई विभाग हैं। ऐसे में इन मंत्रियों के विभागों में कटौती की सम्भावना है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा और पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर के इस्तीफे और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री रहे पृथ्वीराज चव्हाण को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाए जाने के कारण केंद्रीय मंत्रिपरिषद में तीन पद रिक्त हुए हैं।
मंत्रिपरिषद में फेरबदल के साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति का भी गठन होना है। ऐसे में कांग्रेस इस फेरबदल के जरिए संगठन व सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी। सरकार व संगठन दोनों में युवाओं को मौका मिलने की खासा चर्चा है।
वर्तमान में कुछ मंत्री ऐसे भी हैं जो सरकार के साथ-साथ संगठन में दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक, एम. वीरप्पा मोइली, ए. के. एंटनी और वी. नारायणसामी शामिल हैं। माना जा रहा है कि फेरबदल में इन्हें दोहरी भूमिका से मुक्त किया जा सकता है।पार्टी में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के पालन के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि यह पूरी तरह पार्टी अध्यक्ष का विशेषाधिकार है।












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