समुद्री लुटेरों के कारण बढ़ा नुक़सान

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ज़्यादातर नुक़सान सोमालिया के समुद्री लुटेरों के कारण हो रहा है. हालाँकि समुद्री लुटेरों के कारण होने वाले नुक़सान का आकलन इतना आसान नहीं, लेकिन इस रिपोर्ट के एक शोधकर्ता का कहना है कि वर्ष 2005 से ये नुक़सान पाँच गुना बढ़ गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ जल क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के बावजूद समुद्री लूट की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है और ऐसी घटनाओं का दायरा भी बढ़ा है. इस अध्ययन से ये बात भी सामने आई है कि वर्ष 2006 से क़रीब 1600 समुद्री लूट-पाट की घटनाएँ सामने आई हैं और 54 से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान भी गँवाई है.
इस साल के शुरू में जो आँकड़े सामने आए हैं, उनसे पता चलता है कि दुनियाभर के क़रीब 500 लोग अभी समुद्री लुटेरों के कब्ज़े में हैं. पिछले पाँच वर्षों में सोमालिया के समुद्री लुटेरों को औसतन डेढ़ लाख से लेकर अधिकतम 50 लाख डॉलर तक फ़िरौती दी गई है.
अध्ययन में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया गया है कि कैसे समुद्री लुटरों के बढ़ते प्रभाव के कारण सुरक्षा मामलों में ख़र्चों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है. आकलन ये है कि समुद्री लुटेरों से निपटने के लिए नौसैनिकों की तैनाती और सुरक्षा उपकरणों में ज़्यादा ख़र्च हो रहा है. सिर्फ़ सोमालिया के आसपास नौसैनिक अभियान में हर साल दो अरब डॉलर का ख़र्च आ रहा है.
सबसे ज़्यादा नुक़सान जहाज़ों का रास्ता बदलने के कारण हो रहा है. समुद्री लुटेरों के प्रभाव वाले क्षेत्र से बचने के लिए जहाज़ों के मार्ग बदलने पर 2.4 से तीन अरब डॉलर का ख़र्च आ रहा है. रिपोर्ट में तीन इलाक़ों की समस्याओं का अध्ययन किया गया है. ये इलाक़े हैं- पूर्वोत्तर अफ़्रीका, नाइजीरिया, गिनी की खाड़ी और मलक्का जलडमरुमध्य.
बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता गॉर्डन कोरेरा के मुताबिक़ समुद्री लुटेरों के कारण वास्तविक नुक़सान का आकलन काफ़ी कठिन है लेकिन ये निश्चित रूप से बढ़ रहा है.












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