महंगाई के सामने प्रधानमंत्री और उनके नगीने लाचार

25 दिसंबर को खत्म हुए सप्ताह में महंगाई दर के 18 फीसदी पर आ जाने से चिंतित केंद्र सरकार महंगाई पर लगाम लगाने की बातें हनमेशा करती रहती है। लेकिन इसके बाद भी महंगाई और केंद्र सरकार में दो हाथ का फासला हमेशा बरकरार रहता है। चूहा-बिल्ली के इस खेल में महंगाई की मार से जनता की कमर टूट रही है और बनियों, सूदखोरों और कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों की पो बारह हो गई है।
उल्लेखनीय है कि महंगाई दरों में लगातार इजाफे की एक प्रमुख वजह सब्जियों और प्याज के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी है। चावल, गेहूं और दालों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं जबकि प्याज की आपूर्ति कम होने से देश के ज्यादातर इलाकों में इसकी कीमत 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। महंगाई दर में लगातार वृद्धि के चलते भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। इस महीने रिजर्व बैंक की अर्धतिमाही समीक्षा जारी होनी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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