राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड में फूट

छात्र राजनीति में कांग्रेस की छाप को गहरी करने और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कांग्रेस में शामिल करने की राहुल गांधी की मुहिम अब फीकी पड़ रही है। कांग्रेस की युवा ब्रिगेड युवा कांग्रेस और एनएसयूआई दोनों पहले से ही एक दूसरे के विरोधी हुआ करते थे, कि अब इन दोनों के अंदर भी फूट दिखने लगी है।
संगठनों के अंदर बने गुट
युवा कांग्रेस में फूट का सबसे बड़ा कारण रहा, लोकतांत्रिक ढंग से कराए गए चुनाव। उत्तर प्रदेश को विभिन्न जोन में बांटकर चुनाव कराए गए, जिसमें कई पदाधिकारी चुन कर आए। यही चुनाव संगठन के लिए कड़वाहट भरा हो गया। चुनाव में हारे हुए सदस्यों ने जीते हुए पदाधिकारियों का साथ देना बंद कर दिया। देखते ही देखते युवा कांग्रेस में गुट-बाजी शुरू हो गई और आज आलम यह है कि एक गुट का व्यक्ति दूसरे से बात तक नहीं करना चाहता है।
जरा सोचिए राहुल गांधी के सपनो को साकार करने वाली युवा कांग्रेस जब खुद टूटी हुई है, तो दूसरों को क्या जोड़ेगी। ऐसा ही कुछ हाल एनएसयूआई का है। जरा सोचिए अगर इस तरह का संगठन लेकर एनएसयूआई छात्र संघ चुनावों में उतरेगी, तो क्या होगा। जी हां निश्चित तौर पर इसका फायदा समाजवादी युवजन सभा और समाजवादी छात्रसभा को मिलेगा।
उत्तर प्रदेश मध्य जोन के एक पदाधिकारी व लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व नेता ने कहा कि युवा कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े छात्र व युवा संगठन की मजबूती या विकास की जगह यह अगले चुनाव में अपने-अपने प्रत्याशी को लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। यही नहीं अगले चुनावों का इंतजार कर रहे युवा नेता भी अपने-अपने गुट का ही उत्थान कर रहे हैं। छात्रसंघ की बहाली की फिलहाल कोई खबर नहीं है, लेकिन युवा संगठनों में फूट कांग्रेस को 2012 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में जरूर नुकसान पहुंचा सकती है।












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