पिता की गर्दन काटने वाले बेटे को मिली सजा-ए-मौत
नई दिल्ली। आदमी सफलता पाने के लिए कुछ भी कर सकता है, यहां तक की दौसत की चका-चौंध और रूतबे की लालच में इंसान ये भी भूल जाता है कि क्या सही है और क्या गलत? राजधानी दिल्ली में ऐसी ही एक रोंगटे खड़े करने वाली घटना सामने आयी है। यहां के उत्तरी दिल्ली के नबी करीम इलाके के निवासी जितेन्द्र ने अपने आप को सिद्ध करने के चक्कर में अपनी ही पिता का सिर कलम कर डाला। और ये ही नहीं उसने अपने पिता का सिर काटकर मंदिर में चढ़ा दिया था।
जितेन्द्र ने घटना से एक दिन पहले सपना देखा था कि यदि वह बलि चढ़ाए तो उसका वैवाहिक जीवन बेहद सुखी हो जाएगा और वो बेहद अमीर हो जाएगा। इसी से प्रेरित होकर उसने चाकू खरीदा और पिता का सिर काटकर पड़ोस के मंदिर में देवी दुर्गा को चढ़ा दिया। यह घटना 13 मार्च 2008 ही है।
लेकिन कहते हैं ना पाप का घड़ा एक ना एक दिन तो भरता ही है, सो जितेन्द्र को भी उसके किए सी सजा मिली और मंगलवार को राजधानी की तीस हजारी कोर्ट ने बेटे को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस घटना को रेयरेस्ट आफ द रेयर की श्रेणी में मानते हुए कहा कि इस दिलदहला देने वाली घटना के लिए फांसी से कम कोई भी सजा नहीं हो सकती है। अदालत ने जितेन्द्र पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।













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