बरकरार है सुनामी में लापता बच्चों की वापसी की आस
नई दिल्ली। सार्जेट रवि शंकर की बेटी दिसम्बर 2004 में आई सुनामी में गायब हो गई थी। इस घटना को छह साल बीत चुके हैं, लेकिन वह अभी तक उसका इंतजार कर रहे हैं। जिस समय सुनामी आई थी, उनकी बेटी अपूर्वा आठ वर्ष की थी। सुनामी की लहरों ने अपूर्वा को उसके पिता की बाहों से छीन लिया था। शंकर को उम्मीद है कि वह अब 14 वर्ष की हो चुकी है और जीवित है। उन्हें अधिक उम्मीद इसलिए भी है, क्योंकि पुलिस ने उनसे कहा था कि आपदा के बाद अपूर्वा को एक राहत शिविर से अपहृत कर लिया गया था।
वायु सेना अधिकारी, शंकर की आशा इतनी मजबूत थी कि जब इस तरह की रिपोर्ट आई कि एक लड़की केरल के तटीय कस्बे, मलप्पुरम में देखी गई थी, जो कि सुनामी के दौरान अपने पिता से अलग हो गई थी, तो उन्होंने मलप्पुरम का दौरा किया। शंकर ने बताया, "मुझे पुलिस से फोन आया कि एक किशोरी जिले में देखी गई है। वह मछुआरों के दल के साथ थी। मैं उस लड़की को लेकर दिल्ली आया और वह चार दिनों तक मेरे साथ रही। मैंने डीएनए परीक्षण के लिए शहर के एक अस्पताल से भी सम्पर्क किया, लेकिन मेरे रिश्तेदारों ने कहा कि वह मेरी बेटी नहीं थी।"
भावुक शंकर ने कहा, "मैं उस लड़की को अपनी बेटी की तरह रखना चाहता था, क्योंकि वह भी सुनामी पीड़ित थी। लेकिन उसने कहा कि वह अपने अभिभावकों के पास वापस जाना चाहती है। मैं उसे वापस केरल पहुंचा दिया।"
जिस समय 26 दिसम्बर, 2004 को सुनामी आई थी, शंकर कार निकोबार द्वीप पर तैनात थे। सुनामी में भारत के पूर्वी तट पर लगभग 12,000 लोग मारे गए थे। इनमें से अधिकांश मौतें तमिलनाडु में हुई थीं। लगभग दो लाख लोगों की आजीविका और मकान नष्ट हो गए थे।
शंकर, अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ खतरनाक लहरों में बह गए थे। उनकी पत्नी किसी तरह एक पेड़ को पकड़ पाने में सफल हो गई थी। शंकर के एक वर्षीय बेटे ने अधिक समुद्री पानी पी लेने के कारण उनकी बाहों में ही दम तोड़ दिया था। अपूर्वा, पिता के दूसरे हाथ से छूट कर अलग हो गई थी और दोबारा कभी नहीं दिखाई दी। लेकिन हाल ही में शंकर की उम्मीद तब बढ़ गई, जब उन्होंने एक समाचार पत्र में एक लेख पढ़ा, जिसमें लिखा था कि सुनामी में गायब हुए कुछ बच्चे श्रीलंका के कोलम्बो में छह वर्ष बाद अपने परिवार में वापस पहुंच गए हैं।
रुधे स्वर में शंकर ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि अपूर्वा जीवित है और एक दिन वह घर जरूर लौटेगी। मैं उसका इंतजार कर रहा हूं।" शंकर के अलावा और भी ऐसे हैं, जो अपने बच्चों का इंतजार कर रहे हैं। वायु सेना के पूर्व अधिकारी एम.वेंकटरमन अपने 18 वर्षीय बेटे अरविंद श्रीनिवासन की तलाश में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। वह भी सुनामी में लापता हो गया था।
सुनामी के एक दिन बाद जीवित बचे इन दोनों परिवारों को चेन्नई के तामबरम स्थानांतरित कर दिया गया था। एक महीने बाद शंकर और वेंकटरमन अपने बच्चों के चित्रों के साथ वापस कार निकोबार चले गए थे। उन्हें बताया गया कि दोनों बच्चों को द्वीप के एक राहत शिविर में देखा गया था, लेकिन उन्हें वहां अपहृत कर लिया गया था।
शंकर ने कहा, "कुछ महिलाओं ने मुझे बताया कि मेरी बेटी एक राहत शिविर में थी और कुछ दिनों बाद वह गायब हो गई। उसके बाद से मैं अपनी बेटी के चित्र के साथ नियमित रूप से तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश के गांवों की यात्रा कर रहा हूं। पिछले छह वर्षो में मैंने ऐसे कई लोगों से मुलाकात की, जिन्होंने कहा था कि उन्होंने मेरी बेटी को देखा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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