यौन हिंसा के खिलाफ कदम उठाए संयुक्त राष्ट्र : भारत
संयुक्त राष्ट्र, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। युद्ध रोकने, शांति समझौता, शांति स्थापना एवं युद्ध के बाद पुनर्निमाण के क्षेत्रों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी की वकालत करते हुए भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं यौन हिंसा के खिलाफ कड़े कदम उठाए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को 'यौन हिंसा और युद्ध' विषय पर सुरक्षा परिषद में बहस के दौरान कहा कि भारत का मत है कि संयुक्त राष्ट्र सचिवालय एवं कोष तथा कार्यक्रम इस संदर्भ में बहुत कुछ कर सकते हैं।
अमेरिकी नागरिक अधिकार समर्थक नेता मार्टिन लूथर किंग के कथन 'जहां अन्याय होता है, वहां न्याय की राह निकल ही आती है' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 'विश्वास करता है कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले को न्याय के कटघरे में अवश्य लाया जाना चाहिए।'
पुरी ने कहा, "हमारा मत है कि राष्ट्रीय शक्तियां निर्णय ले सकती हैं और दंडित कर सकती हैं तथा यह सुनिश्चित करने में सहयोग कर सकती हैं कि न्याय होगा एवं दोषी को सजा मिलेगी।"
उन्होंने कहा, "यह जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नहीं है, लेकिन उसका परम कर्तव्य है कि वह यह साबित करने के लिए कि वे किसी मामले में कमजोर नहीं हैं, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा ऐसे हालात पैदा करे, जहां वे अपने सामथ्र्य का अहसास कर सकें।"
पुरी ने कहा, "मैं सिख पंथ से ताल्लुक रखता हूं।" याद करते हुए उन्होंने कहा, "चार सदी पहले जब भारत में अस्थिरता का माहौल था और लड़ाई-झगड़े बढ़ रहे थे, तब गुरु गोबिंद सिंह ने हमें आदेश दिया था कि युद्ध बंदी महिलाओं के साथ काफी इज्जत से पेश आएं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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