मुरादाबाद केंद्रीय करागार में शिक्षक की भूमिका निभाएंगे कैदी
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद केंद्रीय कारागार के शिक्षित कैदी बहुत जल्द ही 'गुरू जी' की भूमिका अदा करते नजर आएंगे। जेल में बंद ये कैदी निरक्षर कैदियों को शिक्षा देंगे ताकि वे स्वावलम्बी बन सकें।कारागार प्रशासन ने जेल में बंद पढ़े-लिखे करीब 100 कैदियों की सूची बनाई है, जो जेल में बंद अपने साथी कैदियों को विभिन्न विषयों की शिक्षा देंगे। जेल प्रशासन ने जिन 100 कैदियों की सूची बनाई है उनमें कुछ वाणिज्य और गणित विषयों में स्नातक और परास्नातक हैं, तो कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा हासिल कर चुके हैं।
मुरादाबाद केंद्रीय कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वी. के. त्रिपाठी ने आईएएनएस से कहा कि हमारा उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देकर अशिक्षित कैदियों के जीवन में शिक्षा का प्रकाश फैलाना है ताकि वे मुख्य धारा से जुड़ सकें।
त्रिपाठी ने बताया कि पढ़े-लिखे कैदियों द्वारा जेल में चलाई जाने वाली कक्षाओं में तीन प्रकार का कार्यक्रम चलाया जाएगा। पहले कार्यक्रम के तहत निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाया जाएगा ताकि वह लिखने पढ़ने योग्य बन सकें। दूसरे कार्यक्रम में उन्हें नैतिक शिक्षा दी जाएगी तथा तीसरे के तहत उन्हें स्वावलम्बी बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई और बुनाई जैसे रोजगार परक कार्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वर्तमान समय में मुरादाबाद केंद्रीय कारागार में करीब 2000 कैदी हैं। जेल में महिला कैदियों की संख्या करीब 200 के आसपास है।उन्होंने कहा कि हमारा ऐसा मानना है कि नैतिक शिक्षा कैदियों का जीवन सुधारने में मदद करेगी और साथ ही वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।












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