भारत और चीन हमेशा के लिए दोस्त हैं: वेन

गुरुवार को वेन जियाबाओ महात्मा गांधी की समाधी पर जाएँगे और फिर विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से मिलेंगे. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बातचीत दिल्ली के हैदराबाद हाउस में होगी जिसके बाद वे व्यापार और सुरक्षा संबंधित विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे.भारत और चीन के बीच व्यापार 2004 के 13.5 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर इस समय लगभग 50 अरब अमरीकी डॉलर हो गया है. भारत का सबसे ज़्यादा व्यापार भी चीन के साथ ही होता है. अगले साल ये आंकड़ा बढ़ कर 60 अरब डॉलर हो जाएगा.
वेन जियाबाओं ने बुधवार को दिल्ली में कहा कि इस यात्रा के दौरान भारत-चीन के बीच 16 अरब डॉलर के व्यापारिक समझौते होंगे. इनमें से सबसे बड़ा शंघाई इक्ट्रिक कॉर्पोरेशन और रिलांयस इंडस्ट्रीस के बीच लगभग नौ अरब डॉलर का है.बुधवार को दिल्ली में भारत-चीन व्यापार सहयोग सम्मेलन के दौरान वेन जियाबाओ ने कहा, "मीडिया में कुछ लोगों ने कहा है कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी हैं...मैं इस विचार से सहमत नहीं हूँ, दोनों अर्थव्यवस्थाएँ साझीदार हैं."उन्होंने ये भी कहा - "मैं भारत दोस्ती और सहयोग बढ़ाने आया हूँ. पहले की उपलब्धियों को और पुख़्ता किया जाएगा और नई चुनौतियों से निपटा जाएगा."
लेकिन सभी की नज़र टिकी है दोपहर में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओं के उस भाषण पर जिसमें वे भारत-चीन रिश्तों पर अपना नज़रिया रखेंगे.दिल्ली के टैगोर इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों से बात करते हुए वेन ने कहा, "हमारे यहाँ आने के बाद, मेरा और मेरे सहयोगियों का बहुत गर्मजोशी से स्वागत हुआ है. मैं मानता हूँ कि हम ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि हम दोस्त हैं, सदा के लिए दोस्त हैं.उनका ये भी कहना था कि 'चीन में छात्रों का मानना है कि लगभग 2.5 अरब लोगों वाले दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग से हम एशिया को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं जिसका पूरे विश्व पर असर होगा.'
गुरुवार को चीन और भारत के प्रधानमंत्रियों के बीच सामरिक मुद्दों और सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी.भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश कह चुके हैं कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के लोगों को चीन जाने के लिए स्टेपल वीज़ा यानी नत्थी किया हुआ वीज़ा देने पर भारत को आपत्ति है और ये भारत के लिए अहम मुद्दा है.उधर चीन ने तिब्बत के मुद्दे पर काफ़ी संवेदनशील रुख़ अपनाया हुआ है और कुछ महीने पहले उसने तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश जाने पर आपत्ति जताई थी.दिल्ली में उनकी यात्रा के दौरान तिब्बती युवाओं ने प्रदर्शन किए हैं और जंतर-मंतर पर तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन हो रहा है.












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