ईरान: मस्जिद के पास धमाका, 30 की मौत

आशूरा या 'यौमे आशूरा' का सभी मुसलमानों के लिए महत्व है लेकिन शिया मुसलमानों के लिए इसकी ख़ास अहमियत है. आशूरा करबला में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है. हुसैन पैंग़ंबर हज़रत मोहम्मद के नवासे थे.
सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत सुन्नी बहुल इलाक़ा है जहाँ अकसर शिया भेदभाव किए जाने की शिकायत करते रहे हैं. यहाँ कई बार पहले भी झड़पें हो चुकी हैं. ये प्रांत अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान सीमा से सटा है. इस साल जुलाई में प्रांत की राजधानी में शिया मस्जिद पर हमला हुआ था जिसमें 27 लोग मारे गए थे.
शिया-सुन्नी झड़पें
माना जा रहा है कि बुधवार का धमाका शिया धार्मिक यात्रियों को निशाना बनाकर किया गया है. ईरानी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक चाबहार सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली बटेनी ने बताया है कि दो हमलावर थे और एक को पकड़ लिया गया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमले के लिए ज़िम्मेदार सुन्नी चरमपंथी गुट जुनदल्लाह को ज़िम्मेदार माना जाएगा. हालांकि अभी स्पष्ट नहीं है कि हमला किसने किया.
जुनदल्लाह को पिछले महीने अमरीका ने आतंकवादी गुट घोषित किया था. अक्तूबर 2009 में जुनदुल्लाह ने कहा था कि एक आत्मघाती हमले के लिए वो ज़िम्मेदार था जिसमें 31 लोग मारे गए थे. सिस्तान-ब्लूचीस्तान ईरान के सबसे ग़रीब इलाक़ों में से है.












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