शांति समझौता नहीं थोपेंगे: अमरीका

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि ओबामा प्रशासन इसराइल और फ़लस्तीन के बीच मतभेद कम करने की अपनी कोशिशें जारी रखेगा लेकिन वह अपनी ओर से दोनों पक्षों पर कोई शांति समझौता नहीं थोपेगा.
उनका कहना है कि शांति का रास्ता दोनों पक्षों को मिलकर ही तलाश करना होगा.
उन्होंने अगले हफ़्ते से दोनों पक्षों से परोक्ष रुप से बातचीत शुरु करने की भी घोषणा की है.
उन्होंने पिछले हफ़्ते शांति प्रक्रिया में आई एक बड़ी बाधा पर नाख़ुशी भी ज़ाहिर की, जिसमें अमरीका को कहना पड़ा था कि वह इसराइली कब्ज़े वाली फ़लस्तीनी ज़मीन पर नई बसाहट का काम रोकने के लिए इसराइल को राज़ी करने की अपनी कोशिशें बंद कर रहा है.
फ़लस्तीनी प्रशासन की शर्त है कि पहले इसराइल नई बस्तियाँ बसाने का काम बंद करे तभी शांति समझौते पर आगे बातचीत हो सकती है.
अमरीका की इस घोषणा के बाद फ़लस्तीनी नेताओं ने कहा था कि इसराइल के साथ शुरु हुई शांति वार्ता संकट के दौर में है.
हाल ही में अमरीका को यह कहना पड़ा था कि वह इसराइली कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़े में नई बसाहट का काम रोकने के लिए इसराइल को मनाने में सफल नहीं हो सका है और अब अमरीकी प्रशासन ने इसके लिए इसराइल को मनाने के प्रयास छोड़ दिए हैं.
यह मध्यपूर्व में शांति वार्ता को फिर से शुरु करवाने के प्रयासों का हिस्सा था क्योंकि फ़लस्तीनियों ने शर्त रखी है कि नई बसाहट के निर्माण कार्यों पर रोक लगाए बिना आगे बातचीत नहीं करेंगे.
गत सितंबर में पश्चिमी तट पर इसराइली निर्माण कार्य पर लगी रोक के दस महीने की मियाद पूरी हो गई थी और इसराइल ने इस मियाद को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था.
इसके बाद फ़लस्तीनियों ने शांति वार्ता स्थगित कर दी थी.
उल्लेखनीय है कि इसराइल ने पश्चिमी तट, जिसमें पूर्वी यरुशलम शामिल है, पर वर्ष 1967 से कब्ज़ा कर रखा है. वह वहाँ सौ से अधिक बस्तियाँ तैयार कर रहा है जहाँ पाँच लाख यहूदियों को बसाया जाना है.
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह अवैध है लेकिन इसराइल इसका खंडन करता है.
इस समय पश्चिमी तट के इलाक़े में कोई ढाई लाख इसराइली नागरिक रह रहे हैं.












Click it and Unblock the Notifications