'अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस' पर विशेष : व्हीलचेयर पर सिसकती जिंदगी

नई दिल्ली। भारोत्तोलक जोगिंदर सिंह सलूजा की जिंदगी पोलियो के कारण व्हीलचेयर तक सिमट कर रह गई थी लेकिन उन्होंने अपने लिए एक नई राह तलाश ली। आज हजारों विकलांग लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके जोगिंदर जब पहली बार व्यायामशाल पहुंचे थे तो लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था।

चौबीस वर्षीय जोगिंदर जब 10 महीने के थे तभी वह पोलियो से पीड़ित हो गए थे। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय विकलांगजन दिवस' के अवसर पर शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील द्वारा 'प्रेरणा स्रोत पुरस्कार' वर्ग में विकलांगजनों के सशक्तिकरण के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले व्यक्तियों में शामिल किया गया।जोगिंदर ने कहा, "मेरे लिए यह सपने के सच होने जैसा है। मैंने पिछले छह साल के दौरान शारीरिक रूप से विकलांगजनों के लिए जो काम किया है, उसके लिए मुझे यह पुरस्कार दिया जा रहा है। यह मेरी कड़ी मेहनत का पुरस्कार है।"

सामाजिक न्याय और अधिकारिकता मंत्रालय हर साल विकलांगों के सशक्तिकरण के लिए पुरस्कार देता है। इन पुरस्कारों की शुरुआत 1969 में हुई थी। इस साल 13 विभिन्न श्रेणियों में 63 पुरस्कार दिए जाएंगे।जोगिंदर ने कहा, "मेरे लिए यह पुरस्कार बहुत खास है। मैं इस पुरस्कार को ग्रहण करने वाला अब तक का सबसे कम उम्र का व्यक्ति हूं। मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ वहां हर साल देश के हर कोने से आने वाले कई विकलांग छात्रों को परामर्श देने का काम कर रहा हूं।"

उन्होंने बताया कि वह पिछले छह साल से ऐसे छात्रों के दाखिले की प्रक्रिया और कॉलेज में उनके चयन के लिए काम कर रहे हैं।जोगिंदर ने कहा कि उन्होंने 'पैरालम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया' द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर भारोत्तोलन में कई स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं।उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रीय स्तर का भारोत्तोलक हूं और 'बॉडीबिल्डिंग' व 'पॉवर-लिफ्टिंग' के क्षेत्र में कई बार मि. इंडिया का खिताब जीत चुका हूं।"

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