विकिलीक्स : लश्कर-ए-तैयबा से मिला हुआ है पाकिस्तान
ब्रिटिश समाचार पत्र 'द गार्जियन' में प्रकाशित समाचार के मुताबिक मुम्बई हमले के छह सप्ताह बाद पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपनी निराशा जताते हुए अमेरिका से कहा था कि पंजाब प्रांत की शहबाज शरीफ सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध से बचने में आतंकी गुट की मदद की है।
जरदारी ने इस्लामाबाद में अमेरिकी राजदूत ऐन पैटरसन से कहा था कि एक माह पहले शहबाज शरीफ ने लश्कर-ए-तैयबा के धड़े जमात-उद-दावा को प्रतिबंधों की पूर्व सूचना दे दी थी जिसके चलते लश्कर ने अपने सभी बैंक खातों से नकदी निकाल ली।
अमेरिकी राजनयिक इस आरोप की पुष्टि करने में सक्षम नहीं थे लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि जमात-उद-दावा को कहीं से सूचना मिली थी।जनवरी 2009 को प्रेषित किए गए इस दस्तावेज में कहा गया, "गृह मंत्रालय से मिली सूचनाओं से पता चलता है कि बैंक खातों में अचानक बेहद कम नकदी बची।"
वहीं शहबाज के सलाहकार और सांसद परवेज राशिद ने कहा, "इसमें कोई सच्चाई नहीं है।"उन्होंने कहा कि शहबाज को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकती क्योंकि संयुक्त राष्ट्र केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करता है न कि प्रांतीय सरकार के साथ।













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