‘अमरीका को ईरान पर हमले के लिए उकसाया’

दस्तावेज़ों की नई खेप से इस बात की झलक मिलती है कि सऊदी अरब ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के मकसद से कई बार अमरीका को ईरान पर हमले के लिए उकसाया.अमरीकी दूतावासों की ओर से भेजे गए क़रीब ढाई लाख संदेशों को जारी कर विकीलीक्स ने दुनियाभर में खलबली मचा दी है.ब्रिटेन के समाचार पत्र गार्डियन ने मूल दस्तावेज़ों की जांच के बाद कहा कि सऊदी अरब के शासक अब्दुल्ला बिन अब्द अल अज़ीज़ और उनके सहयोगी अमरीकी सैन्य अधिकारी जनरल डेविड पेट्रियस से कई बार मिले.
इस दौरान उन्होंने ईरान पर निशाना साधा और इराक़ में उसकी नकारात्मक भूमिका पर अपनी चिंता ज़ाहिर की.दस्तावेज़ों के अनुसार अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत आदेल अल ज़ुबेर ने कई बार यह ज़िक्र किया कि अब्दुल्ला बिन अज़ीज़ अमरीका को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और उस पर हमला करने के लिए कहते रहे हैं.उन्होंने कहा, ''वो चाहते हैं कि सांप का सिर काट दिया जाए''
सऊदी शासक और उनके सभी सहयोगी इस बात पर एकमत थे कि इराक़ पर ईरान के प्रभुत्व को कम करने के लिए सउदी अरब अमरीका के साथ मिलकर काम करे.सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान पर बेहद कड़े प्रतिबंध लगाए जाने चाहिएं. यहां तक की इनमें से कुछ प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बगै़र भी लगाए जा सकते हैं.
हालांकि इन दस्तावेज़ों में सऊदी अरब के बारे में अमरीकी अधिकारियों की नकारात्मक राय का ज़िक्र भी है.अमरीका के कूटनीतिज्ञों की राय है कि सऊदी अरब अल-क़ायदा जैसे सुन्नी चरमपंथी संगठनों को आर्थिक मदद देने में आगे है.अमरीकी गृहमंत्रालय के दस्तावेज़ यह भी कहते हैं कि खाड़ी क्षेत्र 'कतर" भले ही कई साल से अमरीकी सेना का गढ़ रहा हो लेकिन वो अमरीका के साथ अपनी नज़दीकियों को जग ज़ाहिर करना नहीं चाहता और यही वजह है कि कतर की सेना कुख्यात चरमपंथियों के खिलाफ़ कार्रवाई से भी झिझकती है.












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