आखिर कब तक JPC पर ठप होती रहेगी संसद!
यहां सवाल ये उठता है कि क्या एक 2जी स्पैक्ट्रम की JPC जांच करा देने से देश में फैला भ्रष्ट्राचार खत्म हो जायेगा। स्पैक्ट्रम घोटाले को जन्म देने वाले अगर बेनकाब हो जायेगें तो देश के भूखे लोगों रोटी मिल जायेगी या वो नौजवान जो एक नौकरी का सपना लेकर आंखो में चलते हैं उनका वो सपना पूरा हो जायेगा। अगर विपक्ष यूं ही चिल्लाता रहा और पक्ष यू ही मौन रहा तो क्या देश की वो समस्याएं जिनको खत्म करने का दावा हमारे नेता गण करते हैं तो उनका खात्मा हो जायेगा?
आप जवाब देंगे नहीं? क्योंकि ऐसा हो ही नहीं सकता है। ये सिर्फ राजनीति का खेल हैं। विपक्ष को एक मु्द्दा मिल गया है जिसके तहत वो अपने आप को जनता का सेवक कह कर केवल सरकार गिराना जानती है। उसे आम जनता से कोई लेना-देना नहीं है। जबकि वहीं सत्ताधारी सरकार के पास संसद की कार्रवाई को ठप करने के सिवाय और कोई काम नहीं है। वो हॉट सीट पर है सो संसद की कार्रवाई स्थगित कर देने का आर्डर दे देती है। और लगातार वो वो ही कर भी रही है, क्या उसे इसी काम के लिए हमने, आप ने हॉट सीट पर बैठाया था।
अगर विपक्ष चिल्ला रहा है तो वो क्यों मौन है ? क्या वो संसद सत्र के खत्म होने का इंतजार कर रही है, उसे क्या हो गया है ? यहां हम ये नहीं कह रहे है कि दोषियों को सजा नहीं मिलनी चाहिए, जरूर मिलनी चाहिए लेकिन घोटालों की जांच के आगे मुद्दे और भी तो है, जिनका हल खोजना अनिवार्य है। आखिर वो कैसे सामने आयेंगे। कुल मिलाकर आम जनता विपक्ष और सत्ता की इस लड़ाई में पिस कर रह गयी है। अब आप ही बताइये कि क्या हम गलत हैं? अपने सुझाव हमें नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में पोस्ट करें हमें इंतजार है ये जानने का कि जनता क्या चाहती है, विपक्ष की प्रेम या सत्ता का मौन?













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