शरारती कांग्रेसियों से सावधान: करुणानिधि

उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के कुछ शरारती नेताओं को डीएमके के साथ गठबंधन अच्छा नहीं लग रहा है, वो इसे तोड़ना चाहते हैं और कांग्रेस नेताओं की ये ज़िम्मेदारी है कि वे ये तत्वों को काबू में रखें.'' करुणानिधि ने कहा कि अगले विधानसभा चुनावों में केवल डीएमके कांग्रेस के सहयोग से धार्मिक कट्टरपंथी ताक़तों को राज्य से दूर रख सकती है. उन्होंने कहा कि 2जी घोटाले पर संसद की कार्यवाही में व्यवधान न आए इसलिए डीएमके ने अपने मंत्री ए राजा से इस्तीफ़ा देने को कहा था.
संसद में हंगामा
करुणानिधि का कहना था कि नेहरू के जमाने में तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णामचारी पर आरोप लगे थे और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था और उसके बाद मामला शांत हो गया था. उनका कहना था कि लेकिन इस्तीफ़े के बाद भी संसद नहीं चल रही है, ये उचित नहीं है कि 'एक ब्राह्मण (टीटी कृष्णामचारी) पर रुख़ अलग है और एक दलित (ए राजा) पर रवैया अलग है.'
ग़ौरतलब है कि इसके पहले 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले को लेकर संसद में विपक्ष के हंगामे के बाद करुणानिधि ने कहा था कि उनके सहयोगी ए राजा ने संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस्तीफ़ा दिया है. उस दौरान करुणानिधि ने राजा की तुलना ईवी रामास्वामी, सीएन अन्नदुरै और बीआर अंबेडकर से करते हुए कहा कि इस्तीफ़ा देकर उन्होंने ज़िम्मेदारी, निष्पक्षता और साफ़गोई का परिचय दिया है.












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