अब बिहार की रफ्तार से जुड़ेगा पूरा देश
नीतीश कुमार ने जिस तरह पांच वर्षों में बिहार की तस्वीर बदल दी और उसकी धीमी गति को तेज़ रफ्तार में बदल दिया, उससे यह साफ है कि विकास ही अब हर राज्य के चुनाव का मुद्दा होगा। यही नहीं अगले आम चुनावों में भी लोग पार्टियों का आंकलन विकास को आधार बनाकर ही करेंगे।
बिहार को फॉलो करने वालों में सबसे आगे होंगी मायावती। भले ही वो प्रत्यक्ष रूप से कुछ न कहें, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से वो नीतीश के मॉडल को जरूर पढ़ेंगी। यदि वो ऐसा ना करके मूर्तियां लगवाने में ही व्यस्त रहीं, तो 2012 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का सूपड़ा साफ भी हो सकता है।
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नीतीश के मॉडल को अब कांग्रेस को भी फॉलो करना पड़ेगा। नहीं तो केंद्र में कांग्रेस का भी डिब्बा गोल हो सकता है। कांग्रेस अभी तक अपने भ्रष्टाचार में फंसती नजर आ रही है। तमाम घोटालों में बुरी तरह उलझ चुकी कांग्रेस ने अगर अपने शासित राज्यों का विकास नहीं किया, तो जनता की मार उसे भी सहनी पड़ेगी।
बिहार में इस बार जो नहीं चला वो था परिवारवाद। लालू यादव का परिवार पूरी तरह राजनीतिक पटल से पूरी तरह गायब हो गया। ऐसी ही गलतफहमी कांग्रेस को केंद्र में और समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में भी है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव, बहु डिंपी यादव, भाई शिवपाल सिंह यादव, गोपाल यादव और भतीजे धर्मेंद्र यादव। सभी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं। अगर मुलायम सिंह अपने
कार्यकर्ताओं व जनता की ओर ध्यान देने के बजाए परिवार की ओर ध्यान देते रहे तो जिस प्रकार लालू की लालटेन बुझ गई है, उसी प्रकार उनकी साइकिल पंक्चर भी हो सकती है।













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