कंधमाल दंगा मामले में 14 लोगों को सज़ा

हालांकि शनिवार को इस मामले में अदालत ने छह और लोगों को पर्याप्त सबूत न होने के कारण रिहा कर दिया. इन सबपर दंगों के दौरान अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के लोगों के घरों में आग लगाने का आरोप था. फूलबनी की फास्ट ट्रैक अदालत ने शनिवार को जिन दो मामलों में फ़ैसला सुनाया उनमें से पहले मामले में दंगाईयों ने रायकिया थाना क्षेत्र के बुढामा गांव में कई घरों को आग लगा दी थी.
स्थानीय पत्रकार संदीप साहू ने बीबीसी को बताया कि न्यायधीश सीआर दास की फास्ट ट्रैक अदालत ने इस मामले में दोषी सात लोगों को तीन साल की सज़ा और 4500 रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई. बालीगुडा थाना क्षेत्र के सेंधी गांव में आगजनी के एक अन्य मामले में न्यायधीश सीआर दास ने सात आरोपियों को 6,500 रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई.
ईसाई विरोधी दंगों पर विरोध जताया गया था
पर्याप्त प्रमाण न होने के चलते सुजैली गांव में आगजनी के छह आरोपियों को बरी कर दिया गया. गुरुवार को इसी अदालत ने दंगों के दौरान रुदांगिया गांव में हुई एक हत्या के मामले में दो व्यक्तियों को दोषी करार देते हुए छह साल की कैद और 5000 रुपए जुर्माने की सज़ा दी थी. कंधमाल दंगों के सिलसिले में कुल 831 मामले दर्ज हुए थे जिनंमें लगभग 700 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
इन मामलों की सुनवाई के लिए खासतौर पर दो फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई गईं. साल 2008 के अगस्त महीने में उड़ीसा के कंधमाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या कर दी गई थी. जिसके बाद ईसाइयों के ख़िलाफ़ हमले हुए थे जिनमें 38 लोग मारे गए थे और 25 हज़ार से ज़्यादा बेघर हो गए थे.












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