करुणानिधि ने राजा को बेदाग बताया, कहा इस्तीफा नहीं देंगे

A Raja
चेन्नई/नई दिल्ली। विवादित 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन मामले में एक ओर जहां केंद्र सरकार पर केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा को पद से हटाने का दबाव बढ़ता जा रहा है वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि शुक्रवार को राजा के बचाव में खुलकर सामने आ गए।

करुणानिधि ने कहा कि राजा को इस्तीफा देने और पार्टी को इस मामले में कांग्रेस को सफाई देने की कोई जरूरत नहीं है। ए. राजा ने अपने एक बयान में कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और वह इस्तीफा नहीं देंगे।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर विपक्ष राजा के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इसी वजह से संसद के शीतकालीन सत्र के शुरुआती तीन दिनों में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। दूसरी ओर ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की प्रमुख जे. जयललिता ने भी राजा को हटाने पर केंद्र सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का प्रस्ताव देकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया।

वहीं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के घटक दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने अपने सहयोगी ए. राजा को बेदाग बताकर उनके इस्तीफा देने की आवश्यकता से इंकार कर दिया है। करुणानिधि ने यहां संवाददाताओं से कहा, "राजा ने क्या गलत किया है? उन्होंने नियमानुसार काम किया है।"

उन्होंने कहा, "उनका कोई दोष नहीं है। प्रमोद महाजन और अरुण शौरी के कार्यकाल में भी कोई नीलामी (स्पेक्ट्रम) नहीं हुई थी। उन्होंने भी 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति के आधार पर स्पेक्ट्रम दिए थे। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में भी इसी नीति का पालन किया गया।" नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पर सवाल पूछे जाने पर करुणानिधि ने कहा कि वह रिपोर्ट जारी होने के बाद ही कोई टिप्पणी कर सकते हैं।

इस मुद्दे पर कांग्रेस से बात किए जाने के संबंध में सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, "स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर कांग्रेस से बात करने की कोई आवश्यकता नहीं है।" करुणानिधि के इस बयान से एक दिन पहले एआईएडीएमके की नेता जे. जयललिता ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार को समर्थन देने की बात कही थी।

जयललिता ने कहा है कि यदि डीएमके, राजा को बर्खास्त किए जाने के बाद केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस लेती है, तो उनकी पार्टी सरकार को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार रहेगी। जयललिता के इस बयान पर सवाल पूछे जाने पर करुणानिधि ने कहा कि उन्होंने केंद्र के दरवाजे खटखटाए लेकिन वे बंद हैं। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। विधानसभा में राज्य के वित्त मंत्री के. अंबाझगन ने एआईएडीएमके के ओ. पोरसेल्वम से जयललिता के प्रस्ताव के संदर्भ में कहा, "आपने दिल्ली के दरवाजे खटखटाए, लेकिन वे नहीं खुले।"

पोरसेल्वम ने जवाब में कहा कि दरवाजे जल्द ही खुल जाएंगे। इस पर करुणानिधि ने कहा, "हमें पता है कि दरवाजे खुलेंगे या नहीं।" वहीं, ए. राजा ने अपने एक बयान में कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उनके इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत के विचाराधीन है और न्यायपालिका के समक्ष सारी सच्चाई साबित कर दी जाएगी। राजा ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, "मुझे न्यायपालिका में पूरा विश्वास है। सारी चीजें न्यायपालिका पर निर्भर करती हैं। "

इस्तीफे से जुड़े सवाल पर राजा ने कहा, " यह मामला अदालत के विचाराधीन है। हम अदालत में सब कुछ साबित कर देंगे। मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। हमने वर्ष 1999 की दूरंसचार नीति पर अमल करते हुए 2जी लाइसेंस दिए।"

राजा कांग्रेस की सहयोगी डीएमके के सांसद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने वित्त और कानून मंत्रालय के सुझावों को ताक पर रखते हुए 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया। इससे सरकार को 170,000 करोड़ रुपये की चपत लगी। जयललिता के इस रुख पर राजा ने कहा कि इस मामले में एआईएडीएमके प्रमुख के बोलने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, "उनके पास इस मामले में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"

इस कथित घोटाले का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर हुआ है। इस बारे में राजा ने कहा, "मैंने अब तक यह रिपोर्ट नहीं पढ़ी है। मैं मीडिया द्वारा पेश किए जा रहे तथ्यों पर टिप्पणी नहीं करूंगा।"

दूरसंचार विभाग की ओर से बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया गया था। इसमें कहा गया था कि 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन सरकारी नीति के मुताबिक किया गया। इस हलफनामे में यह भी कहा गया है कि कैग को सरकारी नीति पर सवाल खड़े करने का आधिकार नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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