'नहीं कहा कि उसी साल से रोज़ 20 किलोमीटर सड़क बनेगी'

लेकिन मंगलवार को लोकसभा में हुआ इस लक्ष्य का लेखा-जोखा और साथ ही हुई इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी बहस. कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने कभी ये घोषणा ही नहीं की थी कि उसी साल, उसी वक़्त 20 किलोमीटर प्रति दिन की दर से सड़कें बनने लगेंगीं.मामला तब उठा जब लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस विषय पर कमलनाथ के जवाब पर गहरा असंतोष ज़ाहिर किया.
उन्होंने कहा कि कमलनाथ ने अपने जवाब में कहा है कि 20 किलोमीटर प्रतिदिन का लक्ष्य प्रशिक्षित और आंशिक रूप से प्रशिक्षित लोगों की कमी और वित्तीय मंदी के कारण पूरा नहीं हो पाया है.सरकारी दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा, "अप्रैल से जुलाई 2010 तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 572 किलोमीटर की सड़कें बनाईं या मरम्मत कीं या चौड़ी कीं, जो पाँच किलोमीटर से भी कम प्रतिदिन बनता है."
लोकसभा में शोर के बीच कमलनाथ ने ये माना कि उन्होंने पिछले साल जून-जुलाई में कहा था कि लक्ष्य 20 किलोमीटर सड़क प्रतिदिन बनाना होगा और एक साल बाद तक मंत्रालय इसको पूरा करने का प्रयास करेगा.कमलनाथ का कहना था, "मैंने ये कभी घोषणा नहीं की कि उसी वक्त और उसी साल 20 किलोमीटर प्रतिदिन की दर से हम सड़कें बनाएँगे. मैंने ये कहा था और दोहराना चाहता हूँ कि ये असंभव बात है....100 दिन के कामकाज में (जब लक्ष्य तय हुआ था) 20 किलोमीटर प्रतिदिन की दर से सड़क नहीं बन सकती. हमने कहा था कि एक साल में हम इस लक्ष्य की ओर चलेंगे."
उनका कहना था, "केवल लक्ष्य तय करने से परियोजनाएँ नहीं बनतीं. इसके साथ-साथ इसको पूरा करने की कार्रवाई - इंजनीयिरिंग, फ़ीज़ेबिलिटी रिपोर्ट, भू-अधिग्रहण इत्यादी करना होता है." कमरनाथ के इस कथन पर ख़ासा शोर हुआ.
उन्होंने बताया कि जून 2009 से सितंबर 2010 तक 12.01 किलोमीटर प्रतिदिन की दर से नई सड़क का निर्माण हो रहा है. उनका कहना था कि ये आंकड़े इंटरनेट पर हैं कि कहाँ कितनी सड़क बनी.आज 14704 किलोमीटर पर काम चल रहा है और इस साल 8000-10 हज़ार और
इस वित्त वर्ष के अंत तक 21 हज़ार वर्क इन प्रोग्रेस होगा.केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि आज 14704 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है.लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी नरेगा के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लागू करने में भष्टाचार हो रहा है और इन पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए.












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