यौन उत्पीड़ित बच्चों में शीजोफ्रेनिया का खतरा ज्यादा
आस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बच्चों में शीजोफ्रेनिया व अन्य मानसिक विकृतियां जैसे तनाव, आत्महत्या की कोशिश जैसे व्यवहार विकसित हो सकते हैं।
'आर्काइव्स ऑफ जनरल साइकिएट्री' जर्नल के मुताबिक मार्गेट क्विटेजर और उनके साथी अध्ययनकर्ताओं ने अपने अध्ययन में 16 वर्ष से कम उम्र के यौन प्रताड़ित 2,759 बच्चों में मानसिक विकृतियों की दर की एक तुलनात्मक समूह में शामिल 4,938 लोगों से तुलना की।
अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग बचपन में यौन प्रताड़ना के शिकार होते हैं उनके 30 साल की अवधि में शीजोफ्रेनिया या अन्य मानसिक बीमारियों से पीड़ित होने का खतरा तुलनात्मक समूह के लोगों की अपेक्षा दोगुना हो जाता है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए वक्तव्य में कहा गया है कि बचपन में हुई यौन प्रताड़ना के कई मामले तो कभी भी सामने नहीं आ पाते हैं और ऐसे प्रताड़ित बच्चों की कुल संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि यौन प्रताड़ित बच्चों में मानसिक बीमारियां होने का खतरा ज्यादा होता है इसलिए उन्हें चिकित्सकीय व सामाजिक सहयोग मिलना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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