मंदी से उबरने के लिए 600 अरब डॉलर

यह राशि अगले साल के मध्य तक दे दी जाएगी.नई घोषित नीति के तहत अमरीका का केंद्रीय बैंक वित्तीय बाज़ार में अपनी सक्रियता बढ़ाएगा और सरकारी बॉन्ड्स और उनकी देनदारियों को ख़रीदेगा.इन सबके लिए वो कुछ नए स्रोतों से अर्जित धन ख़र्च करेगा.अर्थव्यवस्था में धन के इस प्रवाह को बढ़ाने की इस योजना को इसीलिए 'क्वांटिटेटिव इज़िंग' यानी तनाव में परमाणात्मक कमी की संज्ञा दी गई है.
जहां तक संघीय बैंक का सवाल है तो जानकारों के मुताबिक़ बैंक को सरकारी कर्ज़ और दूसरी देनदारियों पर ब्याज़ दर में कमी करनी चाहिए जिससे कि व्यापार के ज़रिए और आम लोगों के ज़रिए होने वाले ख़र्च को बढ़ावा मिले.केंद्रीय बैंक की इन प्रयासों से ये भी संभव है कि शेयरों के दाम बढ़ जाएं ताकि लोग इनकी ख़रीद बिक्री की ओर आकर्षित हो सकें.इस पूरी क़वायद का मक़सद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है जिसकी रफ़्तार काफ़ी धीमी है.
अमरीका में 9.6 प्रतिशत कामकाज़ी लोग बेरोज़गार हैं. इसके अलावा ऐसे और लोग भी हैं जिन्हें काम की तलाश है और उनकी कोई आधिकृत गिनती भी नहीं हुई है.केंद्रीय बैंक की एक दूसरी चिंता मुद्रास्फीति में आई कमी भी है जिसकी वजह से क़ीमतों में गिरावट की आशंका है. यदि ऐसा हुआ तो इससे एक अलग समस्या उत्पन्न हो जाएगी.कुछ विशेषज्ञों ने मुद्रा यु्द्ध की चेतावनी भी दी हैअर्थव्यवस्था में धन के तेज़ी से प्रवाह का एक ख़तरा ये भी है कि इससे मुद्रास्फीति में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है. साथ ही वित्तीय संपत्तियों की क़ीमतों में भी अस्थिरता का डर है.इन्हीं सब ख़तरों को देखते हुए केंद्रीय बैंक की इस नीति को निर्धारित करने वाली समिति के एक सदस्य ने इसके ख़िलाफ़ वोटिंग की है.
उसने चेतावनी दी है कि इन सब उपायों से देश की अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है साथ ही इससे डॉलर भी कमज़ोर हो सकता है.डॉलर का कमज़ोर होना उस स्थिति का सूचक हो सकता है जिसे करेंसी वॉर यानी 'मुद्रा-युद्ध' कहते हैं.कुछ आलोचकों का ये भी कहना है कि इस फ़ैसले के साथ ही अमरीका दुनिया के अन्य देशों की परेशानियों को अपने सिर पर उठा रहा है.हालांकि बहुत से अर्थशास्त्रियों ने केंद्रीय बैंक के इस फ़ैसले का समर्थन भी किया है.बहरहाल जानकारों का यही कहना है कि बराक ओबामा को यदि दोबारा चुनाव जीतना है तो उन्हें अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने की रफ़्तार तेज़ करनी ही होगी.












Click it and Unblock the Notifications