अनाज मुद्दा : सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ढिलाई पर फिर फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक बार कहा कि गोदामों में सड़ रहा अतिरिक्त अनाज भूखे और गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले परिवारों को तत्काल दिया जाना चाहिए। अनाज गोदामों में सड़ने, समुद्र में फेंकने या चूहों को खाने नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने कहा इससे पहले भी इस कोर्ट ने अपने आदेश में कह चुका है कि सरकार के गोदामों में क्षमता से अधिक खाद्यान्न है। जिसे अपर्याप्त भंडारण क्षमता के कारण संरक्षित नहीं किया जा सकता तो फिर उसे गरीबों में क्यों नहीं बांटा जाता।
अदालत ने कहा, "भंडारण क्षमता के अभाव के कारण जितना अनाज संरक्षित नहीं किया जा सकता, उसे कम से कम गरीबी रेखा से नीचे की आबादी को बांट दिया जाए।"
हाल की में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि गोदामों में सड़ रहे अनाज को गरीबों में मुफ्त बांटा जाये तब कृषि मंत्री शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट की बात को यह कहकर टालने की कोशिश की थी कि यह केवल एक सुझाव है।
मगर इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था यह सुझाव नहीं, बल्कि यह आदेश है। यह तीसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश दोहराया है। सरकार की इस ढिठाई पर आप क्या कहना चाहेंगे? नीचे लिखे बॉक्स में कमेंट करें।












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