भारत में भी कहर बरपा सकता था इंडोनेशिया का सुनामी

Tsunami
बेंगलुरू। 26 दिसंबर, 2004 की वो सुबह शायद ही कोई भुला पाएगा जब भारतीय महाद्वीप में आये सुनामी ने भारत, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और श्रीलंका में जमकर तबाही मचाई थी। इस बार इंडोनेशिया में गत 24 अक्‍तूबर को जब सुनामी की लहरों ने एक बार फिर कहर ढाया। भूकंप की तीव्रता रिक्‍टेयर पैमाने पर 6.1 थी। हम आपको बता दें अगर यह तीव्रता अधिक होती तो भारत के तटीय इलाकों में एक बार फिर समुद्र अपना कहर बरपा सकता था।

इंडोनेशिया में आए भूकंप व सुनामी में अभी तक 300 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। देश के तटीय इलाकों में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। जरा सोचिए अगर भूकंप की तीव्रता अधिक होती तो क्‍या होता?

भूगर्भशात्रियों के मुताबिक इंडोनेशिया और भारत की टेक्‍टोनिक्‍स (जमीन के नीचे की प्‍लेटें) अलग-अलग है, इसी लिए इस भूकंप व सुनामी का प्रभाव भारत पर नहीं दिखा। दैट्स हिन्‍दी से विशेष बातचीत में लखनऊ विश्‍वविद्यालय के सेंटर ऑफ एडवांस्‍ड स्‍टडी इन जियोलॉजी के भूगर्भशास्‍त्री डा. ध्रुव सेन सिंह का कहना है कि इंडोनेशिया में गत 24 तारीख को आए भूकंप की तीव्रता यदि 7 से अधिक होती, तो यही सुनामी थाईलैंड और मलेशिया में तबाही मचा सकता था।

यही नहीं रिक्‍टेयर पैमाने पर इसकी तीव्रता 8 से अधिक होती तो भारत के तटीय इलाके इसकी चपेट में जरूर आ जाते। डा. सिंह ने यह भी कहा कि सुनामी का कहर कहां कितना होगा, यह भूकंप के केंद्र बिंदु पर भी निर्भर करता है। इंडोनेशिया के भूकंप का केंद्र बिंदु अगर भारतीय महाद्वीप में भारत के निकट होता तो भारत और इंडोनेशिया दोनों पर बराबर से प्रभाव पड़ता। इसमें श्रीलंका भी चपेट में आ सकता था।

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में भारतीय महाद्वीप में आए सुनामी में दो लाख तीस हजार लोग मारे गए थे। उस दौरान अंडमान निकोबार द्वीप समूह, भारत के तटीय इलाके, इंडोनेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुए थे।

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