दिसंबर तक दिल्ली की सड़कों से ब्लूलाइन बसों की विदाई

दिल्ली सरकार ने सोमवार को फैसला लिया कि हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों से पूर्व शहर की कुछ सड़कों पर जाम रोकने के लिए हटाई गई 1,600 ब्लूलाइन बसें राजधानी की सड़कों पर वापस नहीं लौटेंगी।
परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने संवाददाताओं को बताया, "उपराज्यपाल तेजिंदर खन्ना से मंजूरी मिलने के बाद इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी। हम दिल्ली के लोगों को ब्लूलाइन बसों की दया पर नहीं छोड़ सकते।"
उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान एथलीटों और अधिकारियों को लाने ले जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की लो-फ्लोर बसें शहर की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में शामिल हो जाएंगी। इनके साथ अब डीटीसी के पास ऐसी 6,400 बसें हैं।
उन्होंने बताया कि 200-250 रेड बसें (वातानुकूलित) और लाने की योजना है, जो जल्दी ही डीटीसी की बसों में शामिल हो जाएंगी। दिल्ली सरकार की राष्ट्रमंडल खेलों से पहले सभी ब्लूलाइन बसों को सड़कों से हटा लेने की योजना थी।
ब्लूलाइन बस ऑपरेटर सरकार के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में पहुंच गए थे और अब यह मामला अदालत में लम्बित है। राजधानी की सड़कों पर कुल 2,800 ब्लूलाइन बसें चलती हैं। दिल्ली की सड़कों पर इन ब्लूलाइन बसों का सफर रेडलाइन के रुप में साल 1992 में शुरू हुआ था। मगर इन बसों ने दिल्ली की सड़कों पर इतना आतंक मचाया कि बाद में इनका रंग बदल कर इन्हें ब्लू लाइन कर दिया गया।












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