एवरेस्ट पर 19 बार चढ़ने वाले शेरपा लापता

उनके अभियान की देखरेख कर रही एजेंसी का कहना है कि जब वो 7,045 मीटर की ऊंचाई पर रस्सियाँ बाँध रहे थे, उस दौरान वो एवलांच यानी बर्फ खिसकने के शिकार हो गए. नीमा एक दल को 7,129 मीटर की ऊंचाई पर चढ़ने में मदद कर रहे थे. यदि तेज़ हवाएँ धीमी पड़ गईं तो सोमवार को हेलिकॉप्टर को उनकी तलाश में लगाया जाएगा.
शनिवार को इस दुर्घटना के बाद अन्य शेरपाओं ने उनकी तलाश की लेकिन छेवांग नीमा का पता नहीं चला. एक हेलिकॉप्टर को भी इस पर्वतारोही दल के आधार शिविर पर भेजा गया लेकिन रविवार को तेज़ हवाओं के कारण वो उड़ान नहीं भर सका. इस पर्वतारोही अभियान की देखरेख करने वाली कंपनी शंग्रीला ट्रेक्स ऐंड एक्सपीडिशन के जिबन घिमरे का कहना है कि नीमा जब अन्य पर्वतारोहियों की मदद के लिए रस्सियाँ बांध रहे थे और उस दौरान वो पर्वत के ढलान पर थे, उसी समय एवलांच हुआ और वो उसकी चपेट में आ गए.
उनका कहना था कि बाकी लोग इस हादसे से बच गए हैं. जिबन घिमरे का कहना था कि छेवांग नीमा की क्षमताओं और अनुभव को देखते हुए उन्हें लगता है कि वो अब भी जीवित होंगे. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा,'' वो एक अच्छे पर्वतारोही हैं और वो जानते हैं कि जान कैसे बचाई जा सकती है.'' 43 वर्षीय छेवांग नीमा अनुभवी पर्वतारोही हैं और हिमालय की श्रंखलाओं पर उन्होंने अनेक बार चढ़ाई की है. वो अप्पा शेरवा के एवरेस्ट पर 20 बार सफलतापूर्वक चढ़ने के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले थे.












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