बिहार कांग्रेस को राहुल की दवाई

Rahul Gandhi
रूपा झा

बीबीसी संवाददाता, बिहार से

समस्तीपुर में एक बड़ी भी़ड़ को संबोधित करते हुए राहलु ने उन्हीं बातों की धार तेज़ की जिन पर वे मौजूदा सरकार की आलोचना करते रहे हैं. बक़ौल सलमान ख़ुर्शीद बिहार में कांग्रेस बीमार थी पर अब राहुल गांधी के रूप में उसे एक सही डॉक्टर मिला है जिसने सही दवाई दी है.

समस्तीपुर ज़िले में कांग्रेस का कोई विशेष प्रभाव नहीं है और न ही इस बार किसी चमत्कार की उम्मीद की जा रही है फिर भी राहुल गांधी के भाषण के लिए बारिश होने के बावजूद अच्छी ख़ासी भीड़ का जुटना शायद इस बात का संकेत कहा जा सकता है कि लोगों मे राहुल गांधी को लेकर एक उत्सुकता ज़रूर है. सही डॉक्टर और सही दवाई पर फैसला ज़रा रूककर ही आएगा.

पूसा कृषि विश्वविद्दायल के बड़े से मैदान में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी. मंच और आम लोगों के बीच कई परतों की घेराबंदी. हर पत्रकार को घेरे के अंदर जाने के लिए एक सुरक्षा पास और फिर सुरक्षा जांच के घेरे से होकर गुज़रना था. बहरहाल भाषण में राहुल गांधी ने एक बार फिर नीतिश सरकार के विकास के दावों पर कई सवाल उठाए.

उन्होंने कहा,"जितनी मदद यूपीए सरकार ने बिहार को दी, चाहे वो नरेगा में हो, इन्दिरा आवास में हो या राजीव गांधी विद्युतीकरण में हो, उतना किसी और सरकार ने नहीं किया. पर वो पैसा आपतक नहीं पहुंचा. नीतिश जी विकास की बात करते हैं. गलती ये है कि आप उनकी तुलना पिछली सरकार से करते हैं. उनकी तुलना आपको दिल्ली की सरकार से, राजस्थान की सरकार से, आंध्र की सरकार से करनी चाहिए."

पिछले दो दशकों में बिहार के राजनैतिक कैनवैस पर कांग्रेस की मौजदूगी का एहसास भी खत्म सा हो गया है. बिहार के राजनैतिक इतिहास का एक अहम हिस्सा ये पार्टी ज़रूर रही लेकिन अभी अपने अस्तित्व की लड़ाई में जुटी इस पार्टी के लिए ये रास्ता आसान नहीं है. राहुल गांधी ने माना कि रास्ता उनके लिए लंबा है पर वे चलने के लिए तैयार है.उन्होंने कहा कि बिना बिहार और उत्तरप्रदेश के विकास के भारत विकास नहीं कर सकता इसीलिए कांग्रेस इनके विकास के लिए समर्पित है.

पिछले चुनाव में इस ज़िले की दस में से 6 सीटें राष्ट्रीय जनता दल को मिली थी. बाकी चार सीटों पर कांग्रेस, जनतादल यूनाईटेड, लोकजनशक्ति पार्टी और सीपीएम. समस्तीपुर ज़िले में मुख्य मुक़ाबला लालू यादव और नीतिश कुमार के गठबंधनों के बीच ही है. प्रमुख उम्मीदवारों में जनतादल युनाईटेड की टिकट पर समस्तीपुर शहर से कर्पूरी ठाकुर के बेटे और विधि सूचना मंत्री रामनाथ ठाकुर मैदान में हैं.

सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से नीतिश कुमार के करीबी समझे जाने वाले और प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी मैदान में है. पिछले दो बार के चुनाव में वे हार चुके हैं तो निगार इस पर है कि क्या वे हार का चक्र तोड़ पाएंगे. विरासत की राजनीति की सबसे दिलचस्प तस्वीर भी इसी क्षेत्र में सामने आई है. एक ही परिवार के तीन सदस्य बीजेपी और जदयू की अलग अलग टिकटों पर तीन आरक्षित सीटों पर लड़ रहे है. मंजू हज़ारी बीजेपी की टिकट पर रोसड़ा से, मंजू हज़ारी के ससुर रामसेवक हज़ारी जदयू की टिकट पर कल्याणपुर क्षेत्र से और रामसेवक हज़ारी के भतीजा शशिभूषण हज़ारी जदयू की टिकट पर कुशेश्वर स्थान से.

बहरहाल अटकलें केवल ये लग रही हैं कि इन दस सीटों में जदयू को कुछ सीटों का फायदा हो सकता है पर कांग्रेस के लिए कोई बड़ी खबर आने की संभावना कम है. राज्य में बहुत ही कमज़ोर नेतृत्व और ज़मीन पर पार्टी के जर्जर ढांचे की परेशानी, तेज़ी से बदलते राजनैतिक समीकरणों की चुनौती का सामना करने मे कांग्रेस ने ज़ोर तो लगाया है पर जैसा पार्टी खुद मान रही है बिहार में उनका रास्ता लंबा है.. और राजनीति में लंबे रास्तों का सफर आसान तो नहीं ही होता है.

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