कराची में अपराधियों के ख़िलाफ़ अभियान

बीबीसी हिंदी संवाददाता, पाकिस्तान
पाकिस्तान के कराची शहर में हिंसक घटनाओं में 60 से अधिक लोगों की मौत के बाद प्रांतीय सरकार ने अपराधियों के ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का फैसला लिया है. सिंध प्रांत की गठबंधन सरकार के दो प्रमुख दलों पीपुल्स पार्टी और मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट की गुरुवार देर रात एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसमें कराची की स्थिति और शहर में शांति बनाए रखने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार विमर्श किया गया.
इस बैठक में अपराधियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने और हिंसा की घटनाओं में लिप्त लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने पर सहमति जताई गई. सिंध के गृहमंत्री ज़ुल्फिक़ार मिर्ज़ा ने पत्रकारों को बताया, “कराची में अपराध और हिंसा की घटनाओं में लिप्त लोगों के ख़िलाफ कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए संवेदनशील इलाक़ों की सूचि तैयार कर ली गई है."
गृहमंत्री मिर्ज़ा के अनुसार इसमें अर्धसैनिक बल पुलिस की मदद करेंगे और फिलहाल सेना की कोई ज़रूरत नहीं है. कुछ दिन पहले जब शहर में हिंसा भड़क उठी थी तो उस समय कुछ राजनीतिक दलों ने कराची को सेना के हवाले करने की मांग की थी. इस पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा था कि कराची में सेना बुलाने की कोई ज़रूरत नहीं है और प्रांतीय सरकार शांति को बनाए रखने की क्षमता रखती है.
उनका कहना था, “शहर में कई ऐसे इलाक़े हैं जहाँ भारी संख्या में हत्थयार मौजूद हैं जो हिंसा और दूसरे अपरोधों में इस्तेमाल होते हैं. पुलिस सभी इलाक़ों को हत्थयारों से साफ़ करेगी."
हिंसा का दौर
इससे पहले गृह सचिव आरिफ़ अहमद ख़ान की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें अपराधियों और हिंसा में लिप्त लोगों के ख़िलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखा गया. ग़ौरतलब है कि शहर में कथित हत्याओं का ताज़ा सिलसिला मंगलवार की रात उस समय शुरु हुआ था जब मोटरसाइकल पर सवार कुछ अज्ञात लोगों ने एक बाज़ार में गोलीबारी की थी.
पुलिस के अनुसार गोलीबारी में आठ लोग मारे गए थे और 10 अन्य घायल हो गए थे. इस तरह 16 अक्तूबर से लगातार हो रही हत्याओं की संख्या अब 60 से अधिक हो गई है. शहर के सबसे बड़े राजनीतिक दल मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट ने ताज़ा घटनाओं का कड़ा विरोध किया था और बुधवार को शोक दिवस मनाने की घोषणा की थी. साथ ही व्यापारी संगठनों ने भी अपना कारोबार बंद रखा था.
16 अक्तूबर को हिंसा तब शुरु हुई थी जब एक स्थानीय उपचुनाव में दो विरोधी दलों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई थी. बाद में पुलिस को शहर के एक क्षेत्र से तीन शव बरामद हुए थे. पुलिस का कहना था कि इन लोगों के हाथ पाँव बंधे हुए थे और इन्हें यातना देकर मारा गया था.
इस हिंसा के लिए मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट और आवामी नेशनल पार्टी एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं. मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट यानी एमक्यूएम उन उर्दू भाषियों का नेतृत्व करती है जिनके पूर्वज विभाजन के समय भारत से आए थे और अवामी नेशनल पार्टी पठानों का संगठन है. दोनों दल कराची में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.












Click it and Unblock the Notifications