बिहार चुनाव में 'बंदर' बने चुनावी मुद्दा !

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सहरसा। अब तक चुनावों में विकास, सड़क निर्माण, सिंचाई सुविधा, बिजली आदि को मुद्दा बनते सुना गया होगा लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार सहरसा के लिए बंदर भी चुनावी मुद्दा बन गए हैं।

सहरसा विधानसभा क्षेत्र के करीब 15 से 20 गांव के लोग बंदरों के आतंक से त्रस्त हैं। खेत-खलिहानों की कौन कहे घर के अंदर-बाहर बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। इस कारण यहां के लोगों ने तय किया है कि वे उसी प्रत्याशी को ही वोट देंगे जो इन बंदरों से उन्हें निजात दिला सके।

इस विधानसभा के चैनपुर, बरियाही, बनगांव, देवना गोपाल, वाणेश्वर स्थान, डडियाहा, बलहा आदि गांव इन बंदरों के उत्पात से त्रस्त है। सहरसा निवासी संजय सोनी ने आईएएनएस को बताया कि पूर्व में विधायक संजीव कुमार झा ने इन बंदरों के अभयारण्य के लिए पहल की थी परंतु उनकी पहल अब तक कामयाब नहीं हो सकी। आज भी इन बंदरों का उत्पात जारी है।

एक अन्य ग्रामीण आशुतोष झा कहते हैं कि इन बंदरों से जो भी प्रत्याशी निजात दिलाने का वादा करेगा उसे ही हम ग्रामीण वोट देंगे। एक अन्य ग्रामीण का कहना है कि यहां के लोगों को सड़क बिजली की कोई आवश्यकता नहीं हैं केवल जनप्रतिनिधि इन बंदरों से हम लोगों को छुटकारा दिला दें लोग खेती कर क्षेत्र का विकास कर लेंगे।

इधर, वनगांव (दक्षिण) ग्राम पंचायत की मुखिया मंजु देवी का कहना है, " देवना गोपाल क्षेत्र में पहले बहुत पेड़ थे जहां ये बंदर रहते थे। धीरे-धरे इन पेड़ों की कटाई होती गई और बंदरो का निवास स्थान छिनता गया। इसके बाद ये बंदर गांवों में फैलने लगे, जो आज परेशानी का सबब बने हुए हैं। इन बंदरों को भगाना कठिन है लेकिन इनके लिए एक अभयारण्य तो बनाया ही जा सकता है जहां बंदर भी रह सकेंगे और लोगों को इस परेशानी से भी छुटकारा मिल सकेगा। "

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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