अभी तो राजनीति का 'र' भी नहीं जानते आदित्य ठाकरे

जी हां ये सवाल काफी अहम हैं, खास तौर से उन लोगों के लिए जो भावनात्मक रूप से शिवसेना से जुड़े हुए हैं। बाल ठाकरे को यह पता होना चाहिए कि महाराष्ट्र, खास तौर से मुंबई में शिवसेना के विरोधी दल मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में युवा इकाई की कमान 20 साल के आदित्य को थमाना कहां तक सही है।
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कांग्रेस की युवा इकाई का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी 40 के हैं, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव 37 और भाजपा के वरुण गांधी गांधी 30 साल के हैं, जो युवा इकाईयों को संभाल रहे हैं। अब इन महाबलियों के आगे आदित्य कहां तक टिक पाएंगे, यह बड़ा प्रश्न है। अनुभव की बात करें तो मात्र दो चार चुनावी सभाओं में चेहरा दिखा देने से राजनीति नहीं आ जाती है। राजनीति का पाठ पढ़ने में लोगों को कई-कई साल लग जाते हैं।
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सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीए कर रहे आदित्य एक लेखक भी हैं। उनका अंग्रेजी में एक कविता संग्रह 'माई थॉट इन ब्लैक एंड व्हाइट' प्रकाशित हो चुका है। यही नहीं कविता संग्रह हिन्दी और मराठी में भी प्रकाशित हो चुका है। किताबों के बीच उलझे रहने वाले आदित्य को दादा जी द्वारा दी गई राजनीति की तलवार फिलहाल तो भारी पड़ेगी ही।
कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि आदित्य को पूर्ण रूप से राजनीति में उतरने के लिए अभी समय लगेगा। इतनी जल्दी सफलता हाथ लगने वाली नहीं है। केवल पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाना ही राजनीति नहीं है, इसमें सफल होने के लिए लोगों के दिलों में जगह बनाना सबसे महत्वपूर्ण है। अब देखना यह है कि यह 'बाल शिवसैनिक' लोगों के दिलों पर राज कर पाता है या नहीं।












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