आईएमएफ़ ने 'मुद्रा युद्ध' की चेतावनी दी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के प्रमुख ने चीन और पश्चिमी देशों के बीच 'मुद्रा युद्ध' की चेतावनी दी है. आईएमएफ़ के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रास-कान ने कहा है कि ये गंभीर मामला है और आईएमएफ़ इस तरह के संघर्ष को टालने के लिए कुछ प्रस्ताव रखेगा. अमरीका का आरोप है कि युआन की विनमय दर इतनी कम है कि ये एक तरह से चीनी निर्यात को सब्सिडी देने जैसा है.
दूसरी ओर ब्रसेल्स में बुधवार को चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा था कि चीनी मुद्रा के पुनर्मूल्यांकन से चीनी लोगों का काम ठप पड़ जाएगा जिससे सामाजिक समस्या उत्पन्न हो सकती है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थों पर पड़ेगा.
उन्होंने इस बात के कोई संकेत नहीं दिए कि चीन युआन को धीरे धीरे मज़बूत करने जा रहा है. इसके पहले यूरोपीय देशों ने चीन से कहा था कि वो अपनी मुद्रा की विनिमय दर बढ़ाए.
यूरोपीय देशों का आरोप
यूरोपीय देश और अमरीका आरोप लगाते रहे हैं कि चीन जानबूझकर युआन की क़ीमत दूसरे देशों की मुद्रा के मुक़ाबले कम रखता है. इस वजह से अंतररराष्ट्रीय बाजा़र में चीनी माल की क़ीमत दूसरे देशों में बनी चीज़ों से सस्ती होती है.
दूसरी ओर अमरीकी संसद के निचले सदन ने एक विधेयक पारित किया है जिसके अनुसार उन देशों के सामान पर टैक्स लगाया जाएगा जो अपनी मुद्रा की क़ीमत जानबूझकर कम रखते हैं.
माना जाता है कि ये क़ानून चीन को ध्यान में रखकर लाया गया है.हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता आया है. उसका कहना है कि अमरीका और यूरापीय देश विश्व बाज़ार में उसके माल की बढ़ती माँग पर रोक लगाने की कोशिश में हैं. हालांकि जून में चीन ने संकेत दिए थे कि वो अपनी मुद्रा की विनिमय दर में अधिक लचीलापन लाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.












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