हल्की बाई को है राहुल गांधी का इंतजार

टीकमगढ़, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में टीकमगढ़ जिले के बैसा टपरियन गांव की जनजातीय समुदाय की बुजुर्ग हल्की बाई की आंखों की चमक साफ पढ़ी जा सकती है। वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के प्रवास की खबर से जहां उत्साहित है, वहीं उम्मीद लगा बैठी है कि शायद एक बार फिर वह उसके घर पर आएंगे। इस बार वह उनसे न केवल खूब बतियाएंगी, बल्कि अपने गांव का सूरत-ए-हाल बयां कर हालात बदलने की जिद भी करेंगी।

राहुल ने लगभग दो साल पहले 15 अप्रैल 2008 को 70 वर्षीय हल्की बाई के घर रात्रि विश्राम किया था। इतना ही नहीं उन्होंने उसके परिवार के साथ खाना भी खाया था और रातभर खटिया पर सोए थे। यह रात हल्की बाई के परिवार से लेकर गांव वालों तक को अब भी याद है। उन्हें लगता है कि जैसे यह कल की ही बात हो। वे राहुल को अब अपना मानने लगे हैं। दावा तक करते हैं कि राहुल टीकमगढ़ आएंगे तो उनके बीच आना नहीं भूलेंगे।

राहुल का टीकमगढ़ का संभावित दौरा चार अक्टूबर को है। वह इस बार युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से मिलने आ रहे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के आने की खबर जैसे ही बैसा टपरियन पहुंची, यहां के लोग उछल पड़े। यह बात अलहदा है कि उनके कार्यक्रम में टपरियन जाने का कोई जिक्र नहीं है।

हल्की बाई ने आईएएनएस से कहा कि उसे राहुल से क्या बात करना है, वह इसे भी तय कर चुकी है।

हल्की बाई पिछले प्रवास का जिक्र करते थकती नहीं है और कहती है कि इस बार वे राहुल गांधी को गांव की सारी समस्याएं बताएंगी। ताकि आम जन का जीवन सुधर जाए। उनके लिए राहुल भगवान समान हैं, जो उनकी तकदीर बदल सकते हैं।

इंदिरा गांधी को याद करते हुए हल्की बाई कहती है, दादी के शासनकाल में जमीन मिली थी और नाती राहुल के जरिए उनकी जिंदगी में खुशहाली आएगी। बेटी कमला की शादी तो राहुल की मदद से हो ही गई है। ये बात अलग है कि 20 हजार रुपये कांग्रेस और 20 हजार रुपये राज्य सरकार ने दिए थे। जिसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

हल्की बाई बताती है कि हर दूसरे दिन कोई न कोई ऐसा आ ही जाता है, जो उनसे राहुल के बारे में सवाल करता है। इसकी वजह से उन्हें लगता है कि कल की रात ही राहुल उनके घर आए थे।

राहुल के प्रवास के बाद हल्की बाई के घर के सामने से सड़क बन गई है। चबूतरा पक्का हो गया है। अगर कमी रह गई है, तो उस जगह के सीमेंटीकरण की, जहां बैठकर राहुल ने बैठकर खाना खाया था।

राहुल के प्रवास के दो साल बाद गांव का नाम जरूर युवक कांग्रेस ने गोद लेकर राहुल ग्राम टपरियन कर दिया। लेकिन हालात ज्यादा नहीं सुधरे हैं। सरपंच प्रभुदयाल साहू ने सीसी सड़क, विद्यालय के करीब शौचालय, पानी की टंकी जरूर बनवा दी है। ये विकास कार्य इस गांव के लोगों की अपेक्षा से कहीं कम हैं। वे चाहते हैं कि उनके गांव का नक्शा ही बदल जाए, क्योंकि यह किसी और का नहीं राहुल का गांव है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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