नेपाल में चूहे अब नहीं बर्बाद कर सकेंगे फसल!
काठमांडू, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। अब नेपाल में फसलें बड़े पैमाने पर नष्ट नहीं होंगी। यहां के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपाय खोज लिया है जो किसानों की वर्तमान उत्पादकता को 40 प्रतिशत तक बढ़ा देगा।
फसलों के नष्ट होने की सबसे बड़ी वजह चूहों को माना जाता है और 'नेपाल एग्रीकल्चरल सोसायटी' (एनएआरसी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी गोली इजाद की है जो चूहों को बांझ बना देगी और वे अपनी आबादी नहीं बढ़ा सकेंगे। इस शोध में पूरे तीन साल का समय लगा।
एनएआरसी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी पूरनदास धाउबाजी श्रेष्ठ का कहना है, "नेपाल में होने वाले फसलों के नुकसान के आकलन से स्पष्ट हुआ है कि चूहे बाजरे की कुल पैदावार का 35 प्रतिशत, धान का 13 प्रतिशत और गेहूं का 15 प्रतिशत हिस्सा नष्ट कर देते हैं।"
उन्होंने कहा, "हमने सीताफल के बीजों के पाउडर से एक गोली बनाई है। यदि एक चूहा सात दिन तक इन गोलियों को खाता है तो वह प्रजनन के अयोग्य हो जाएगा।"
एनएआरसी ने यह शोध तब शुरू किया जब यहां के अधिकारियों ने बंदरों पर किए गए एक प्रयोग से संबंधित लेख पढ़ा। बंदरों को नीम की पत्तियों से निकलने वाले तरल पदार्थ युक्त भोजन दिया गया था जो उन्हें बांझ बनाता था।
श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल ऐसा पहला देश है जिसने सीताफल के बीजों से यह दवा बनाई है।
इस दवा को बनाने के लिए सीताफल के बीजों के 20 ग्राम पाउडर, गेहूं के आटे, चना व मूंगफली पाउडर और दूध का इस्तेमाल किया गया था।
श्रेष्ठ ने आईएएनएस को बताया कि प्रयोग के लिए दो अलग-अलग पिंजरों में से एक में चार मादा और दूसरे में चार नर चूहे रखे गए थे। उन्हें सात दिन तक यह गोली दिए जाने के बाद बाहरी चूहों के साथ उनमें प्रजनन कराने की कोशिश की गई लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
नेपाल में चूहों की 45 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से पांच प्रजातियों के चूहे फसलों को बुरी तरह नष्ट कर देते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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