लोकतंत्र का पाठ न पढ़ाए पाक, पहले रोके आतंकवाद : भारत (राउंडअप)
संयुक्त राष्ट्र, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कहा है कि पाकिस्तान भारत को लोकतंत्र व मानवाधिकार का पाठ पढ़ाना बंद कर जम्मू एवं कश्मीर में राज्य प्रायोजित आतंकवाद बंद करे। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर भारत को व्याख्यान देने का उसका कोई अधिकार नहीं है।
कृष्णा ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान को लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर भारत को व्याख्यान देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर हमें सीख नहीं दे सकता।"
कृष्णा ने कहा कि पाकिस्तान को अपने उस वादे को हर हाल में पूरा करना चाहिए, जिसके तहत उसने भारत के खिलाफ अपनी धरती का इस्तेमाल न करने देने की बात कही थी।
कृष्णा ने कहा, "यदि पाकिस्तान अपने वादे को पूरा करता है तो यह उस अविश्वास को दूर करने में मददगार साबित होगा, जो दोनों देशों के बीच बेहतर द्विपक्षीय संबंधों के विकास में बाधक बना हुआ है। हम पड़ोसी हैं और पड़ोसी के नाते हमारी एक साथ काम करने की जिम्मेदारी है।"
कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कृष्णा ने कहा कि वह कश्मीर में राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बंद करे।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "यह सर्वविदित है कि कई सारे देशों में यह चिंता गहरी पैठ कर चुकी है कि पाकिस्तान में उग्रवाद और आतंकवाद का जोर है।"
कृष्णा, पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के उस आान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिनमें उन्होंने बुधवार को कहा था कि कश्मीर के लोगों के लिए आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए। कृष्णा ने कहा, "हम इन चिंताओं को समझते हैं, खासतौर से इसलिए क्योंकि जम्मू एवं कश्मीर, जो कि भारत का अभिन्न अंग है, इस तरह के पाकिस्तान प्रायोजित उग्रवाद और आतंकवाद का शिकार है।"
कृष्णा ने कहा, "पाकिस्तान को हर हाल में अपने उस वादे को पूरा करना चाहिए, जिसमें उसने भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए अपनी भूमि का इस्तेमाल न करने देने की बात कही थी।"
इस अवसर पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार के लिए बातचीत को जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने का आह्वान किया। भारत ने कहा कि ज्यादातर देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के पक्ष में हैं।
कृष्णा ने अपने भाषण में कहा, "सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर अंतरसरकारी बातचीत के दौरान ज्यादातर देशों ने परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार करने तथा कार्यशैली में सुधार लाने का समर्थन किया है।"
कृष्णा ने कहा कि यह जरूरी है कि हमें इस बातचीत को जल्द से जल्द तर्कसंगत निष्कर्ष पर पहुंचाना चाहिए।
कृष्णा ने कहा कि यद्यपि विकासशील देशों से संबंधित मुद्दे सुरक्षा परिषद द्वारा उठाए गए हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर विकासशील देशों की आवाज को शायद ही सुना गया हो।
कृष्णा ने कहा, "परिषद का एजेंडा अफ्रीका में जारी विवादों को समाप्त करने का होने के बावजूद सुरक्षा परिषद में अफ्रीका से कोई स्थायी सदस्य नहीं है।"
ज्ञात हो कि भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिल कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, खासतौर से स्थायी श्रेणी के विस्तार के लिए जोर लगा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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