सुरक्षित हैं सभी अगवा पुलिसकर्मी : पुलिस (लीड-1)
स्थानीय समाचार चैनलों ने दावा किया है कि सभी अगवा चारों पुलिसकर्मियों को राज्य के तनावग्रस्त बस्तर क्षेत्र के जंगली इलाके में छोड़ दिया गया है लेकिन पुलिस इन्हें अफवाह बता रही है। यह इलाका तीन दशकों से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "अगवा पुलिसकर्मियों की रिहाई के सम्बंध में जो खबरें आ रही हैं उनमें सबूतों का अभाव है। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। अभी तक तो ये सिर्फ अफवाह ही हैं।"
ज्ञात हो कि यहां से 500 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे भोपालपत्तनम इलाके से 19 सितम्बर को नक्सलियों ने सात पुलिसकर्मियों को अगवा किया था। अगले ही दिन उन्होंने इनमें से तीन की हत्या कर दी थी, जबकि सहायक उपनिरीक्षक सुखराम भगत, कांस्टेबल बी. टोप्पो, नरेंद्र भोंसले और सुभाष रात्रे को मुठभेड़ के बाद बंधक बना लिया था।
पुलिस महानिदेशक विश्व रंजन ने आईएएनएस को बताया, "नक्सलियों की मांग है कि उनके विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान 'ग्रीन हंट' को तुरंत रोक दिया जाए और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बीजापुर जिले के चार गांवों के कुछ लोगों को रिहा किया जाए, कथित फर्जी मुठभेड़ों की न्यायिक जांच कराई जाए और शांति वार्ता की शुरुआत की जाए।"
उप महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा ने पुलिस मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, "हम सभी स्तरों पर बंधकों की रिहाई के उपाय कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि चारों पुलिसकर्मियों को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।"
उन्होंने कहा, "विश्वस्त एवं जानकार सूत्रों ने पुष्टि की है कि अगवा किए गए पुलिसकर्मी सुरक्षित हैं।"
उल्लेखनीय है कि एक सप्ताह बाद भी अगवा पुलिसकर्मियों की रिहाई पर अनिश्चय की स्थिति बनी हुई है। नक्सलियों ने उनकी रिहाई के लिए रविवार की शाम 48 घंटे की मोहलत दी थी। उन्होंने बीजापुर में अपनी मांगोंकी हस्तलिखित पर्चियां गिराई थीं। नक्सलियों ने मंगलवार की शाम समयसीमा को और 24 घंटों के लिए बढ़ा दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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