क्या कहना है मुस्लिम दावेदारों का...

बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
ज़फ़रयाब जीलानी ने हिंदु इतिहासकारों को मददगार बताया
मुसलमान गुटों की ओर से मुक़दमा लड़ने वाले तीन वरिष्ठ वकीलों ज़फ़रयाब जिलानी, मुश्ताक़ अहमद सिद्दिकी और सैय्यद इरफ़ान अहमद ने एक लिखित बयान जारी करके कहा है कि आज का दिन अपने देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन है.
बयान में आगे कहा गया है कि इस जजमेंट से संविधान के मूलभूत तत्त्वों को मज़बूती मिलेगी और न्यायपालिका और क़ानून के शासन पर आम लोगों, विशेषकर अल्पसंख्यकों का विश्वास बढ़ेगा. अदालत में मुसलमान पक्ष के वकीलों ने अपने बयान में कहा है ये केस दो समुदायों के बीच का नहीं है बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप का मामला है.
बयान में कहा गया है, "इस मामले में भगवान राम का व्यक्तित्व कतई किसी विवाद में नहीं है जिन्हें अल्लामा इक़बाल जैसे कवियों ने इमाम-ए-हिंद की पदवी दी थी. ये विवाद बाबर के शासन से भी संबंधित नहीं है जिसने इब्राहीम लोधी को हराकर देश पर अपना शासन स्थापित किया था."
और अंत में उन्होंने अपील की है कि फ़ैसला चाहे किसी के पक्ष हो, कोई ख़ुशी या ग़म प्रकट करने की ज़रुरत नहीं क्योंकि हारने वाले पक्ष के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का मौक़ा खुला हुआ है. इस बयान के अंत में इस बात का ख़ास ज़िक्र है कि बाबरी मस्जिद के दावे के समर्थन में अनेक हिंदु इतिहासकारों, वकीलों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मदद की.












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