सुनवाई करने वाले तीन जज कौन हैं?

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
31 जनवरी, 1952 को जन्मे जस्टिस एसयू खान ने 1971 में विज्ञान में स्नातक होने के बाद 1975 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की.
इसी साल वो इलाहाबाद बार काउंसिल के सदस्य बन गए.
जस्टिस खान ने लोक सेवा और दीवानी से जुड़े मामलों को लेकर मुकदमे लड़े.
उन्होंने अलीगढ़ सिविल कोर्ट में दो साल और इलाहाबाद हाईकोर्ट में 25 साल तक काम किया.
वो वर्ष 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थाई जज के रुप में शपथ ली थी.
24 अप्रैल 1958 को जन्मे जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने कला में स्नातक होने के बाद 1980 में मेरठ विश्वविद्यालय से अपनी वकालत पूरी की.
वर्ष 1980 में उन्होंने टैक्स संबंधी मामलों को लेकर वकालत की शुरुआत की थी लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लोक सेवा से जुड़े मामलों को लेकर अपनी वकालत जारी रखी.
वर्ष 2003 में उन्हें उच्च न्यायालय में उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त अधिवक्ता के रुप में नियुक्त किया गया.
अप्रैल, 2004 में वो वरिष्ठ अधिवक्ता के रुप में पदोन्नत्त हुए.
अक्टूबर, 2005 में उन्हें अतिरिक्त न्यायाधीश के रुप में पदोन्नत किया गया और साल 2007 में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थाई जज के रुप में शपथ ली.
20 अक्टूबर 1948 को जन्मे जस्टिस धर्मवीर शर्मा वर्ष 2005 से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत हैं.
1970 में वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद जस्टिस शर्मा ने उत्तर प्रदेश में मुख्य कानून अधिकारी और सहायक न्यायिक सचिव जैसे पदों पर काम किया.
वर्ष 2002 में उनकी नियुक्ति ज़िला और सत्र न्यायाधीश के रुप में हुई.
अगस्त, 2003 से अगस्त, 2004 के बीच वो उत्तर प्रदेश सरकार में प्रधान न्यायिक सचिव रहे.
वर्ष 2005 में अतिरिक्त जज के रुप में उनकी पदोन्नति हुई और सितंबर, 2007 में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थाई जज के रुप में शपथ ली.
जस्टिस शर्मा एक अक्टूबर, 2010 को अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं.












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