राष्ट्रमंडल खेल : पूर्वोत्तर की 40 हजार महिलाओं को लेकर चिंता
शिलांग, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। विभिन्न एस्कॉर्ट एजेंसियों द्वारा राष्ट्रमंडल खेलों के लिए देश के पूर्वोत्तर हिस्से से की गई 40,000 महिलाओं की नियुक्ति से इस बात की आशंका पैदा हो गई है कि इनमें से अधिकांश महिलाओं को 12 दिवसीय इस आयोजन के दौरान नई दिल्ली में वेश्यावृत्ति के रैकेट में शामिल किया जा सकता है।
पूर्वोत्तर में महिलाओं की तस्करी के खिलाफ काम करने वाले मानवाधिका संगठन, इम्पल्स एनजीओ नेटवर्क की अध्यक्ष हसीना खारबिह ने आईएएनएस को बताया, "पूर्वोत्तर की लगभग 40 हजार लड़कियों को अच्छे पैसे और रोजगार के अवसर का लालच देकर विभिन्न एजेंसियों द्वारा नियुक्त किया गया है, जिसे लेकर हम वाकई चिंतित हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि उन्हें वेश्यावृत्ति के रैकेट में शामिल किया जा सकता है।"
इम्पल्स एनजीओ नेटवर्क और मेघालय सरकार से मिली जानकारी के अनुसार अखबरों में विज्ञापन के जरिए खेलों के दौरान अच्छी जिम्मेदारियों एवं आकर्षक पारिश्रमिक का लालच देकर एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल में दार्जीलिंग एवं सिलीगुड़ी सहित पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से भोलीभाली लड़कियों को आकर्षित किया है।
मेघालय के समाज कल्याण विभाग के मंत्री जे.ए.लिंगदोह ने आईएएनएस को बताया, "ये लड़कियां सिर्फ मेघालय से हीं नहीं नियुक्त की गई हैं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर से। हमने जनता को सतर्क किया है और सजग रहने की अपील की है। हमने जनता से कहा है कि ऐसे किसी भी रैकेट का पता चलने पर हमें सूचित करें।"
लिंगदोह ने कहा, "हमारे पास कोई ठोस विवरण या जानकारी नहीं है, लेकिन हम इसे लेकर चिंतित हैं।"
अब सवाल यह उठता है कि आखिर एस्कॉर्ट एजेंसियां पूर्वोत्तर की लड़कियों को क्यों महत्व देते हैं।
खारबिह ने कहा, "पूर्वोत्तर की लड़कियां आमतौर पर गोरी और अच्छे नाक नक्श की होती हैं और उनकी अंग्रेजी भी अच्छी होती है, इसीलिए उनकी मांग है।"
एक अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा, "आज मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, और यहां तक कि बेंगलुरू एवं पुणे में भी फल-फूल रहे वेश्यावृत्ति के रैकेट में पूर्वोत्तर की लड़कियों की मांग है।"
इनमें से अधिकांश महिलाएं मध्यवर्गीय परिवारों से होती हैं और वे संगठित गिरोहों के जाल में फंस जाती हैं।
खारबिह ने कहा, "इन गिरोह के शातिर संचालक गरीब परिवार की खूबसूरत लड़कियों पर भी नजर रखते हैं। हमने अतीत में गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों से संबंधित लड़कियों को मानव तस्करों के के जाल से छुड़ाया है।"
नई दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन, नार्थईस्ट सपोर्ट सेंटर हेल्पलाइन भी इस तरह की साजिश को लेकर चिंतित है।
हेल्पलाइन की मधु चंदर ने कहा, "प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा खेलों के लिए भर्ती की गईं हजारों लड़कियों को लेकर चिंतित हैं और हमारी चिंता यह है कि उनका दुरुपयोग किया जा सकता है और वे गलत हाथों में पड़ सकती हैं।"
मधु चंदर ने कहा, "हम नई दिल्ली में स्थित पूर्वोत्तर के सभी छात्र नेताओं से अपील करते हैं कि वे पूर्वोत्तर की उन लड़कियों के बारे में पता करें, जो पहले ही इस गंदे रैकेट में फंस चुकी हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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