बिहार में सभी दलों को बाहुबलियों की आवश्यकता!

राज्य की राजनीति में बाहुबलियों की पकड़ कम नहीं हुई है लेकिन इसका तरीका अवश्य बदल गया है। कल तक जो बाहुबली चुनाव मैदान में खम ठोंकते थे अब वे अपने चहेतों को चुनाव लड़ाकर उन्हें विधानसभा भेजने की फिराक में हैं।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पूर्व बाहुबली सांसद प्रभुनाथ सिंह को अपने खेमे में लाकर बाहुबलियों की राजनीति में मांग कम नहीं होने पर मुहर लगा दी वहीं राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद का सीवान जेल में जाकर पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से मुलाकात करना भी इसी का एक हिस्सा था।

राज्य में सत्तासीन जनता दल (युनाइटेड) को भी चुनाव के समय बाहुबलियों से परहेज नहीं है। कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आनंद मोहन के घर जाकर ऐसे संकेत भी दे दिए थे। पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन, मुन्ना शुक्ला, अनंत सिंह, सुनील पांडेय अपने लोगों को टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस में फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई साधु यादव और पप्पु यादव की पत्नी रंजीता रंजन हैं। आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को आलमनगर से उम्मीदवार भी बना दिया गया है। इसके पूर्व लोकसभा चुनाव में पप्पु यादव की पत्नी रंजीता रंजन और उनकी मां कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ चुकी हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में भी सूरजभान जैसे लोग शामिल हैं। वह भी अपने एक दर्जन लोगों को चुनाव मैदान में उतारने की जुगत लगा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक सुरेन्द्र किशोर कहते हैं कि जिस तरह कुछ राजनीतिक दल इस चुनाव में बाहुबलियों को उतारने का मन बना रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि उन्हें जनता के बदले हुए मूड का पता नहीं है। अब राजनीति में बाहुबलियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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