बिहार चुनाव : बाहुबलियों को कितनी भागीदारी!

पिछले कुछ चुनावों से राज्य के बाहुबली भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करते आ रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कितने लोगों को अपना उम्मीदवार बनाते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2005 में लगभग सभी प्रमुख दलों ने अपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनावी दंगल में उतारा था।

एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 में 919 प्रत्याशियों में से 358 ऐसे उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिन पर कई आपराधिक मामले लंबित थे। इनमें 213 ऐसे उम्मीदवार भी शामिल थे जिन पर हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, डकैती और रंगदारी जैसे संगीन मामले दर्ज थे।

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 53 प्रतिशत ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था जिन पर अपराधिक मामले चल रहे थे। इसके बाद लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तथा जनता दल (युनाइटेड) के 44-44 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले लंबित थे।

इसके अलावा कांग्रेस ने 39 प्रतिशत, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 18 प्रतिशत और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने अपराधिक पृष्ठभूमि वाले 32 फीसदी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था।

रिपोर्ट के अनुसार चुनाव परिणाम आने के बाद इनमें से जद (यु) के 39, भाजपा के 32, राजद के 19, लोजपा के 6 और कांग्रेस के तीन ऐसे प्रत्याशी विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे।

राज्य के 'बिहार इलेक्शन वॉच' समन्वयक अंजेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी राजनीतिक दलों से राजनीति को अपराधियों से मुक्त करने की दिशा में कदम उठाने की मांग की गई है। सभी दलों को इसके लिए एक शपथ पत्र भरवा कर टिकट देना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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