अपने ही मुल्क में पाकिस्तानी करार दिया गया खान लौटेगा बिहार
अमृतसर, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। पाकिस्तानी नागरिक करार देकर एक आतंकवादी हमले के मामले में जेल में बंद बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले व्यक्ति को अब रिहा करने की तैयारी चल रही है।
करीब 43 वर्षीय वासिल खान पिछले कई वर्षो से अमृतसर केंद्रीय जेल में कैद है। जेल और जिला प्रशासन ने खान की रिहाई के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। पंजाब की जेलों में करीब 10 वर्षो तक कैद रहने के बाद खान को एक-दो दिन में रिहा कर दिया जाएगा।
अमृतसर के जिलाधिकारी के. एस. पन्नू ने आईएएनएस से कहा, "खान की रिहाई के बारे में हमने सभी औपचारिकताएं और कागजी काम पूरे कर लिए हैं। उसे मंगलवार या बुधवार को रिहा किया जाएगा।"
पन्नू ने कहा, "उसके परिवार को सदस्य रिहाई के लिए तीन-चार दिन पहले यहां पहुंच गए। प्रशासन उन्हें हर तरह की सहायता मुहैया करवा रहा है।"
प्रशासन खान को पाकिस्तानी नागरिक बता रहा था लेकिन उसका परिवार उसे भारतीय नागरिक साबित करने में लगा हुआ था। इस बारे में पंजाब और हरियाण उच्च न्यायालय के न्यायाधीश्या मेहताब सिंह गिल ने फैसला दिया, तब जाकर उसकी रिहाई सुनिश्चित हो सकी है।
पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने पिछले सप्ताह खान की दुर्दशा को संज्ञान में लेते हुए इस बारे में रिपोर्ट मांगी है।
दरअसल, खान को सीमावर्ती गुरुदासपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। खान प्रशासन को यह बताने में असफल रहा कि वह सीमा के करीब क्या कर रहा था। प्रशासन ने उसे पाकिस्तानी नागरिक करार देकर कहा कि वह अवैध तरीके से सीमा पारकर भारत आया है।
सूत्रों ने बताया कि शुरू में पंजाब पुलिस यह नहीं जानती थी कि खान का क्या करना है। अधिकारियों ने उससे कुछ दिनों तक अपने घरों में काम करवाया।
वर्ष 2002 में पुलिस ने लुधियाना के सिरहिंड शहर में हुए विस्फोट से उसका नाम जोड़ दिया। सुनवाई के बाद उसे दोषी करार दिया गया और उसे आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई।
अधिकारियों को जेल में पाकिस्तानी नागरिक के रूप में सजा काट रहे खान को उसके देश भेजने का इंतजार था। इसी बीच पिछले सप्ताह मोहाजरा खातून नामक एक महिला सामने आई जिसने स्वयं को खान का बहन होने का दावा किया।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की रहने वाली खातून ने कहा, "मामूली कहासुनी के बाद खान ने 10 साल पहले घर छोड़ दिया था और उसके बाद से हमने न तो इसको देखा और न ही कुछ सुना। हमने आशा छोड़ दी थी, लेकिन हाल ही में इसका जेल से एक पत्र मिला। जेल के एक सिपाही ने उसे पत्र भेजने में मदद की थी।"
इसके बाद खातून और उनके वकील पति यहां आए। वे यहां के जिलाधिकारी से मिले और कई सारे दस्तावेज दिए जिससे यह प्रमाणित होता है कि खान एक भारतीय नागरिक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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